कर्ज लेकर तो गायब लोग
वहीं, बागेश्वर जिला वसूली में 56.04 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। नैनीताल की बात करें तो यहां के लोग बैंक से कर्ज लेकर तो गायब हैं, वहीं आरसी कटने के बाद भी वह फरार ही चल रहे हैं। यहां वसूली 2.90 प्रतिशत के साथ प्रदेश में सबसे निम्न स्तर पर है।
प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जिले हैं दोनों
नैनीताल और हरिद्वार प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जिलों में से एक हैं। दोनों ही पर्यटन के लिए बहुचर्चित हैं। नैनीताल जिले के लोग बैंकों से कर्जा लेकर फरार चल रहे हैं। वहीं हरिद्वार जिले के लोग आरसी कटने के बाद भुगतान कर रहे हैं।
वसूली के दौरान घरों में नहीं मिलते कर्जदार
बैंकों से उधार लेकर अगर उसे नहीं चुकाया जाए तो आरसी काटी जाती है। आरसी कटने के बाद तहसील स्तर पर अमीन वसूली करते हैं। कई तहसीलों के अमीनों का कहना है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति नजदीक है। वसूली के लिए घरों में जा रहे, लेकिन कर्जदार घरों में नहीं मिल रहे हैं।
जिलेवार लंबित आरसी (करोड़ रुपये में)
जिला लंबित आरसी वसूली प्रतिशत में
हरिद्वार 7.99 74.84
बागेश्वर 0.91 56.04
यूएस नगर 16.30 33.56
रुद्रप्रयाग 3.01 32.23
पिथौरागढ़ 8.11 31.81
उत्तरकाशी 4.36 26.15
देहरादून 80.28 24.10
चंपावत 1.40 17.14
पौड़ी 10.27 8.71
अल्मोड़ा 15.04 6.38
टिहरी 3.62 6.35
चमोली 4.84 3.10
नैनीताल 80.62 2.90
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बैंक को कर्ज न चुकाने पर कर्जदाता को डिफॉल्टर घोषित किया जाता है। आरसी कटने के बाद तहसील स्तर पर उनसे वसूली की जाती है। बैंक और जिला प्रशासन के साथ तहसील प्रशासन वसूली कर रहे हैं। - संजय संत, लीड बैंक अधिकारी, हरिद्वार