घर, मकान, दुकान बैंकों से लोन पर सब कुछ मिल रहा है और लोन लेने वालों की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन कुछ बैंकों के साथ स्थिति एकदम उलट है।
क्या उपाय करें?
इन्हें क्रेडिट यानी लोन के लिए ग्राहक जुटाना मुश्किल हो रहा है। लिहाजा, एनुअल क्रेडिट प्लान (एसीपी) के मानक पूरे करना भी टेढ़ी खीर बना हुआ है। इन्हें समझ नहीं आ रहा कि क्या उपाय करें, जिससे परफार्मेंस चमक जाए।
हर बैंक का एनुअल क्रेडिट प्लान होता है, उन्हें सरकारी योजनाओं के साथ ऋण उपलब्ध कराने के साथ ही पीपीपी और अन्य ग्राहकों को भी लोन देना होता है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के मानकों के मुताबिक साल की पहली छमाही तक बैंक की एसीपी की उपलब्धि 40 फीसदी होनी चाहिए, लेकिन राज्य में कई बैंक ऐसे हैं, जिनकी 25 प्रतिशत से भी कम हैं।
और-तो-और प्रदेश में एक बैंक ऐसा भी है, जिसका एसीपी का खाता तक अभी नहीं खुला है। इस रजिस्टर में वह ‘जीरो’ पर ठहरा है।
एसएलबीसी में भी उठा है मुद्दा
स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की 51 वीं बैठक में भी यह मुद्दा उठा। खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बैंकों से एसीपी पर तेजी दिखाने के लिए कहा। सरकारी योजनाओं की प्रगति भी एसीपी से आंकी जाती है।
यह हैं बैंक और एसीपी की स्थिति (प्रतिशत में)
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया - 23
इंडियन बैंक - 24
यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया - 19
विजया बैंक - 14
स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर - 15
स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद - 10
देना बैंक - 0
फार्मा, नॉन-फार्मा सबमें पीछे बैंक
गतिविधि - उपलब्धि प्रतिशत
फार्मा सेक्टर - 37
नॉन फार्मा सेक्टर - 41
अन्य प्राथमिक क्षेत्र - 39
(आंकड़े वार्षिक ऋण योजना के तहत मार्च से सितंबर तक के हैं)