एसबीआई बैंक प्रबंधन की मनमानी और केंद्र सरकार की विरोधी नीतियों के खिलाफ बैंक कर्मियों ने हड़ताल की। हड़ताल के चलते तीन दिन के लिए एक हजार करोड़ रुपये से ऊपर की चेक क्लियरेंस और करीब 200 करोड़ रुपये के कैश का लेनदेन अटक गया। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल को प्रभावी बनाने में कई बड़े संगठनों ने भी साथ दिया।
एसबीआई के सभी सहयोगी बैंकों के अलावा इलाहाबाद बैंक, पंजाब नेशनल बैंक सहित 12 राष्ट्रीयकृत सरकारी और गैर सरकारी बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इसके चलते 12 सरकारी एवं निजी बैंकों में कामकाज पूरी तरह से बंद रहा।
प्राइवेट बैंकों के कर्मचारी भी बने हिस्सा
काशीपुर, ऊधमसिंह नगर और हल्द्वानी के कई प्राइवेट बैंकों के कर्मचारी भी हड़ताल का हिस्सा बने। कर्मचारी सुबह एश्लेहॉल स्थित इंडियन बैंक के बाहर एकत्र हुए। आंदोलन को इंटक अध्यक्ष एवं विधायक हीरा सिंह बिष्ट ने भी समर्थन देते हुए कहा कि केंद्र सरकार कर्मियों के हितों का दमन कर रही है। सरकार का मकसद इस बहाने कर्मचारियों की छंटनी करना है।
उत्तरांचल इंप्लाइज बैंक यूनियन के महामंत्री जगमोहन मेंदीरत्ता ने कहा कि श्रम नियमों की अनदेखी करके एसबीआई प्रबंधन सभी सहयोगी बैंकों के कर्मियों पर बोझ बढ़ाना चाहता है। काम के घंटे बढ़ाने के साथ ही सातों दिन बैंकिंग कराना चाहता है। यह मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हड़ताल के बाद दो दिन बंदी
उधर शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के चलते पेंडिंग काम अब सोमवार को पूरे किए जाएंगे। हड़ताल और दो दिन बैंक बंद होने से चेक क्लियरेंस और कैश लेन देन वालों को बड़ा झटका लगा है।
प्रदर्शन करने वालों में मुरारी लाल नौटियाल, राजन पुंडीर, आरके गैरोला, सोहन सिंह रजवाड़, विनय कुमार शर्मा, राजेश सिंघल, इंद्र सिंह, सबलोक, डीएन उनियाल, उमेश क्षेत्री, ललित बड़ोनी, एलएम भट्ट, निमेश कुमार आदि मौजूद रहे।
शुल्क जमा करने में आई समस्या
इन दिनों र्जेईई मेंस, एआईपीएमटी और क्लैट सहित कई परीक्षाओं की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चल रही है। इन परीक्षाओं में शुल्क बैंक के माध्यम से जमा होता है। शुक्रवार को हड़ताल होने की वजह से अभ्यर्थी अपना शुल्क जमा नहीं करा पाए। इसके अलावा इलाहाबाद बैंक, देना बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, नैनीताल बैंक, फेडरल बैंक, कर्नाटका बैंक आदि के ग्राहक भी दिनभर परेशान रहे।