बैसाखी का पर्व तीर्थनगरी हरिद्वार और ऋषिकेश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। रविवार सुबह से ही घाटों पर श्रद्घालुओं की भीड़ लगी हुई है। बैसाखी सूर्य संक्रमण यानी सूर्य का मेष राशि में प्रवेश के दिन मनाई जाती है।
इस हिसाब से यह त्योहार इस बार 14 अप्रैल यानी सोमवार को मनाया जाएगा। बीते तीन वर्षों से 13 अप्रैल की तारीख को पर्व पड़ने से लोगों में तारीख पर असमंजस भी है।
14 अप्रैल को बनाई जानी चाहिए बैसाखी
मगर ज्योतिषों के मुताबिक पंचांगों के अनुसार 14 अप्रैल को ही बैसाखी बनाई जानी चाहिए। उत्तराखंड विद्वत सभा उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि 14 अप्रैल को व्याघात योग है, हस्त-नक्षत्र है और सोमवार है।
यह सभी बेहद शुभ हैं। मेष राशि पर सूर्य सुबह 7: 22 बजे प्रवेश करेंगे। पुण्यकाल इससे पहले सुबह 4 बजे से शुरू हो जाएगा। डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि दोपहर एक बजकर 50 मिनट तक पुण्यकाल है।
इसी दौरान पूजन-दान आदि कर लेना चाहिए। बैसाखी पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। दान और सूर्य उपासना होती है।
साल का मंत्री बनता है बैसाखी का दिन
बैसाखी के दिन जो वार होता है, उसका स्वामी ही पूरे साल का मंत्री होता है। सोमवार होने से इस साल का मंत्री चंद्रमा है। इससे पहले साल का राजा भी चंद्रमा ही बन चुका है।
नवरात्र के पहले दिन जो वार पड़ता है, उस दिन का स्वामी ही राजा होता है।
तीन तारीखों में पड़ सकती है बैसाखी
ज्योतिषियों के मुताबिक आमतौर पर बैसाखी 13,14,15 अप्रैल में किसी भी तारीख को पड़ सकता है। दस से बारह साल के अंतर में बैसाखी पर्व 15 तारीख को भी पड़ता है। तीन से चार साल के अंतर में यह पर्व 14 अप्रैल को भी पड़ता है।