वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के लिए लाइफलाइन साबित हुआ रुद्रप्रयाग-चोपता-पोखरी मार्ग आज भी चौड़ीकरण का इंतजार कर रहा है। सामरिक, धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस वैकल्पिक मार्ग का विस्तार तकनीकी कारणों से वर्षों से अटका हुआ है।
आपदा के समय बदरी-केदार यात्रा के लिए सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तलाशने की शासन-प्रशासन की कवायद धरातल पर नहीं उतर पाई है। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा में हजारों लोगों के लिए लाइफलाइन बना सामरिक, धार्मिक व भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रुद्रप्रयाग-चोपता-पोखरी मार्ग का आज तक चौड़ीकरण नहीं हो पाया है।
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क्षेत्र के बलदेव सिंह ने बताया कि वर्ष 2020-21 में लोक निर्माण विभाग ने इसके चौड़ीकरण के लिए जमीन और पेड़ों का सर्वे व मार्किंग पूरी की थी जिससे बजट और काम शुरू होने की उम्मीद जगी थी। मगर यह कार्य आज भी अधूरा है। संकरी सड़क के कारण कार्तिक स्वामी धाम जाने वाले यात्रियों और स्थानीय लोगों को घंटों जाम से जूझना पड़ता है।
उधर लोनिवि के अधिशासी अभियंता इंद्रजीत बोस ने बताया कि रुद्रप्रयाग-पोखरी मार्ग समेत तीन प्रमुख सड़कें राज्य सड़क मार्ग योजना में शामिल हैं जिनका भविष्य में चौड़ीकरण होगा। हालांकि तकनीकी कारणों से अटके इस वैकल्पिक मार्ग के चौड़ीकरण के लिए विभाग को अभी नए दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
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काली चट्टान के पास टूटी सड़क बनी खतरा
गोपेश्वर। निजमुला घाटी के गांवों को जोड़ने वाले बिरही-निजमुला मोटर मार्ग पर काली चट्टान के पास क्षतिग्रस्त सड़क का सुधारीकरण पिछले एक वर्ष से नहीं हो पाया है। सड़क किनारे लगाए गए स्टील गार्डर भी हवा में झूल रहे हैं जिससे मार्ग पर आवाजाही जोखिम भरी बनी है। जनप्रतिनिधियों ने इस संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजा है।
गाड़ी गांव की प्रधान मंदोदरी देवी ने बताया कि कार्यदायी संस्था ने मार्ग पर डामरीकरण तो किया लेकिन क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और सड़क किनारे नाली निर्माण नहीं कराया। ऐसे में वर्षा का पानी सीधे सड़क पर बहने से नुकसान बढ़ सकता है। मोली हडुंग के प्रधान भगत सिंह फरस्वाण ने कहा कि काली चट्टान क्षेत्र का उपचार कार्य भी अधूरा है। उन्होंने शीघ्र यहां सुरक्षा कार्य कराने की मांग की है।