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बदरी-केदार के दर्शन करने वाले यात्रियों को राहत

Tue, 06 May 2014 04:09 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, बदरीनाथ
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बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्राला फंसने से बाधित यातायात दोपहर डेढ़ बजे खुल गया। जिससे केदारनाथ-बदरीनाथ जाने वाले यात्रियों ने राहत की सांस ली।
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बता दें कि सिराबगड़ के पास यह ट्राला मंगलवार सुबह 11 बजे से हाईवे में फंसा हुआ था। सूचना पाकर मौके पर पुलिस प्रशासन पहुंच चुका था।

इससे पहले देश के चार प्रमुख धामों में शामिल श्री बदरीनाथ धाम की यात्रा व्यवधान के बीच सोमवार से शुरू हो गई। तड़के बह्म मुहूर्त में भगवान बदरी विशाल के कपाट आम भक्तों के लिए खोल दिए गए।

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इस दौरान पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने धाम में दर्शन किए लेकिन बदहाल हाईवे और खराब मौसम के चलते करीब डेढ़ हजार तीर्थयात्री कपाटोद्घाटन के मौके पर अखंड ज्योति के दर्शन नहीं कर पाए।
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बदरीनाथ नेशनल हाईवे की स्थिति बेहद खराब होने से पुलिस प्रशासन ने रविवार रात को रड़ांग बैंड तक पहुंचे इन तीर्थयात्रियों को पांडुकेश्वर और गोविंदघाट वापस भेज दिया।

बदहाल हाईवे पर सफर करना काफी जोखिम भरा

हालांकि सोमवार को पुन: धाम पहुंचने पर इन तीर्थयात्रियों ने भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए। मौसम का मिजाज जहां पल-पल बदल रहा है वहीं बदहाल हाईवे पर सफर करना काफी जोखिम भरा है।

बदरी धाम पहुंच रहे यात्री हाईवे पर बैनाकुली, जेपी बैराज और रड़ांग बैंड में जान हथेली पर रखकर सफर करने को मजबूर हैं।

सोमवार को सुबह नौ बजे जैसे ही बदरीनाथ से वाहनों का पहला गेट छूटा तो लामबगड़ में जाम की स्थिति पैदा हो गई।

पुलिस प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा की खातिर हाईवे पर पुलिस कर्मी तैनात करने की बात कही थी, लेकिन यहां संवेदनशील स्थानों पर पुलिस कर्मी तैनात नहीं है।

बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा पर आई भारत सरकार की संयुक्त सचिव वंदना अग्रवाल भी हाईवे की दुर्दशा पर बिफर पड़ी।

तस्वीरों में देखें, भक्तों के ‌लिए खुला भगवान बदरीनाथ का द्वार

उनका कहना था कि केंद्र की ओर से आपदा पुनर्निर्माण के लिए उत्तराखंड सरकार को एक हजार करोड़ की राशि दी गई। इसके बावजूद सड़कों की हालत नहीं सुधरी है।

तुंगनाथ मंदिर के कपाट खुले
तृतीय केदार बाबा तुंगनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं।

अब ग्रीष्म काल के छह माह तक बाबा की पूजा-अर्चना तुंगनाथ मंदिर में होगी। पहले दिन लगभग 150 शिव भक्तों ने बाबा तुंगनाथ के दर्शन किए।

मौसम से पार नहीं पा पाई सरकार

भले ही चार धाम यात्रा जारी रहेगी का दावा हो पर यह साफ है कि सरकार किसी भी सूरत में मौसम से पार नहीं पार पा पाएगी। ऐसे में यात्रा पूरी तरह से मौसम पर निर्भर है।

मौसम पर यात्रा की निर्भरता को कम करने के लिए सरकार के सामने कई सुविधाओं को जुटाने की चुनौती थी। पहली चुनौती ऐसी सड़कों के निर्माण की थी जो बरसात के प्रकोप को सहन कर जाएं।

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छह माह की यात्रा का यह शुरूआती दौर है। हालात बता रहे हैं कि कई इलाकों में सड़कें इस स्थिति में नहीं हैं कि एक बरसात को भी झेल पाएं।

बदरीनाथ मार्ग पर लामबगड़ से लेकर बिनाखोली तक सड़क नदी के बाढ़ क्षेत्र में हैं और पहले से भुरभुरे हो चुके पहाड़ को काट कर बनाई गई है। यही हाल केदार मार्ग का भी है।

बरसात में शायद ही साथ दे पाएं पैदल मार्ग

सोनप्रयाग से रामबाड़ा तक का पैदल मार्ग बरसात में शायद ही साथ दे पाएं। नया अलाइनमेंट इस रूट पर सिर्फ रामबाड़ा से आगे केदारनाथ तक ही है। यह रूट भी अब पहाड़ी के उस हिस्से पर हैं जहां धूप कम रहती है और बर्फ देर से पिघलती है।

इसी तरह रुद्रप्रयाग और गुप्तकाशी के बीच में विजयनगर, सिमली गांव में बरसात के समय सड़क पर भूस्खलन की पूरी आशंका है।

सड़क वही पुरानी है जो आपदा में ध्वस्त हो गई थी। पूरी रोड पर पैचवर्क या फिर ब्लैक टॉप करके काम चला लिया गया है।

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बरसात में यात्रा को जारी रखने की दूसरी चुनौती सरकार के सामने ऐसे तंत्र को विकसित करने की थी जो मौसम का हाल सटीक तरीके से स्थानीयता के आधार पर दे सके।

इसके लिए ग्लेशियर को मॉनिटर करने और उच्च क्षेत्रों में अधिक संख्या में बरसात मापी उपकरण अधिक संख्या में लगाने की जरूरत थी। डॉप्लर रडार अभी लग नहीं पाया है।
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पर्वतीय क्षेत्रों में पल-पल बदल रहा मौसम

ऐसे में बरसात की चेतावनी भी बहुत विश्वनीय नही हैं। यह तब है जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम पल-पल बदल रहा है। मौसम केबदलाव को स्थानीय लोग तक भांप नहीं पा रहे हैं।

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मौसम से पार पाने के लिए जरूरी यह भी था कि पैदल मार्ग पर रेन शेल्टर और सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था हो पाती। यात्रा शुरू हो चुकी है और अभी तक यात्रा मार्ग पर रैन शेल्टर की व्यवस्था नही हो पाई है।

यात्रा की तैयारी को देखकर साफ लगता है कि सरकार का जोर बचाव पर अधिक रहा। यात्रा मार्ग पर हमेशा की तरह खाद्यान्न भंडारण कर लिया गया है।

सरकारी अमला पूरी तरह से मुस्तैद है। पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी फिलहाल देखने को मिल रही है।
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