बदरीनाथ धाम में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
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श्री बदरीनाथ और तुंगनाथ धाम के कपाट बुधवार को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। बदरीनाथ मंदिर के कपाट ब्रह्म मुहूर्त में साढ़े चार बजे विधिविधान और पूजा-अर्चना के साथ खुलेंगे। मंगलवार को पांडुकेश्वर के योग ध्यान बदरी मंदिर से बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वर प्रसाद नबूंदरी और धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल की अगुवाई में भगवान उद्धव की डोली, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और तेल कलश यात्रा (गाड़ू घड़ा) दोपहर 12.27 बजे बदरीनाथ धाम पहुंच गई है। धाम में देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने रावल, शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा यात्रा का फूल-मालाओं और बदरी विशाल के जयकारों के साथ स्वागत किया।
तुंगनाथ की डोली पहुंची चोपता
तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली रात्रि विश्राम के लिए अंतिम पड़ाव चोपता पहुंच गई है। यहां भक्तों ने डोली का जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया। मंगलवार सुबह से मक्कू स्थित भूतनाथ मंदिर में भगवान तुंगनाथ की पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर अपने परिवार की कुशलक्षेम के लिए मनौती मांगी। दोपहर साढ़े बारह बजे उत्सव डोली ने अगले पड़ाव की ओर प्रस्थान किया।
गांव की महिलाओं ने मांगलिक गीतों के साथ डोली को ग्रीष्मकाल के छह माह के लिए कैलाश को विदा किया। भगवान तुंगनाथ की डोली, पाव, चलियाखोड़ और बनियाकुंड होते हुए शाम पांच बजे रात्रि विश्राम के लिए अंतिम पड़ाव चोपता पहुंची। बुधवार को सुबह सात बजे तुंगनाथ की डोली अपने धाम को प्रस्थान कर 10 बजे मंदिर पहुंचेगी। इसके बाद शुभ लग्नानुसार मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।