बाबा रामदेव ने कहा कि पूर्वजों का ज्ञान, निरंतर प्रयोग और नए अनुसंधान उनकी ताकत हैं। लेकिन कभी खुद को सर्वशक्तिमान नहीं कहा, बल्कि एलोपैथिक चिकित्सकों को बुलाकर उनके सामने क्लिनिकल ट्रायल किए।
स्वामी रामदेव ने दावा किया कि डब्ल्यूएचओ के पीछे भी फार्मा इंडस्ट्री खड़ी है। हम सभी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को सम्मान देते हैं। आज यदि योग को अंतरराष्ट्रीय दिवस का दर्जा मिला है तो योग की इससे बड़ी वैश्विक प्रमाणिकता और क्या हो सकती है। आयुर्वेद को भी यह स्थान मिलकर रहेगा।
बाबा रामदेव ने कहा कि उन्होंने कुछ प्रश्न पूछे हैं। प्रश्न पूछना राजद्रोह नहीं है। भले ही वैक्सीन आ गई हो, लेकिन वह भी सौ प्रतिशत कारगर नहीं है। एलोपैथी सभी रोगियों को ठीक नहीं कर पाई। अस्पतालों में इलाज के बावजूद तीन लाख से अधिक कोरोना रोगियों का निधन हुआ।
उनमें वैक्सीन ले चुके डॉक्टर भी शामिल थे। योग के बाद आयुर्वेद को भी यह दुनिया पूरी तरह स्वीकार कर लेगी। उन्होंने कहा कि उनके मन में किसी के प्रति बैर नहीं है, परंतु सम्मान जरूरी है।