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न इन्हें नेता का पता न नोटा का

Tue, 06 May 2014 02:14 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून से केवल नौ किलोमीटर दूर एक गांव ऐसा भी है जहां चुनाव के नाम पर लोगों को सिर्फ सात तारीख याद है।
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इस गांव में न तो कोई नेता वोट मांगने आया और न ही इन्हें निर्वाचन आयोग की नई सुविधा नोटा (नन आफ द एबाव) की जानकारी है। अमर उजाला टीम ने उन्हें नोटा की जानकारी दी तो ग्रामीणों ने इसे अच्छा विकल्प बताया।

इंडियन मिलिट्री अकादमी (आईएमए) के बगल से जाने वाला रास्ता टी इस्टेट से होते हुए अंबीवाला गांव पहुंचता है। अमर उजाला टीम यहां पहुंची तो लोग चाय की पत्तियों की छंटाई करते मिले।
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उम्र गुजर गई, हमेशा वोट दिया लेकिन नेताओं की बेरुखी का गुस्सा इनमें साफ नजर आया। पूछने पर बुजुर्ग धनपति ने कहा कि हमें तो आज तक किसी नेता ने कोई फायदा नहीं दिया।

उम्र कट गई चाय की पत्तियों में। इसके बाद तो सबने नेताओं पर जमकर गुस्सा उतारा। बुजुर्ग तारावती ने बताया कि उन्हें सिर्फ इतना पता है कि सात तारीख को वोट पड़ेंगे। अब कौन नेता है, काहे के वोट हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
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बुजुर्ग बाबूलाल का कहना था कि वोट तो हम देते हैं लेकिन हमें तो कोई पूछने वाला नहीं है।

श्यामकला, नारायणदेई, शकुंतला, रामप्यारी, सोमती, पार्वती, पुष्पा, प्रेमवती, ओमवती, राजाराम, राजेंद्र, शशि प्रसाद और वाल्टर ने भी कुछ इसी अंदाज में अपना दुख बयां किया।

NOTA : Not Aware
टी इस्टेट में मैनेजर नीरज उपाध्याय से सबसे पहले नोटा के बारे में पूछा। उन्होंने उल्टा सवाल किया कि नोटा क्या है।

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जब उन्हें बताया गया तो उन्होंने इसे एक अच्छा प्रयास बताया। कहा कि इसके बारे में हर आम आदमी को जानकारी देनी चाहिए।

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इसके बाद शीला, निर्मला, तारावती जैसे कई मतदाताओं ने कहा कि अगर ऐसा बटन है तो ऐसे नेताओं से बचने को वह इसे दबाना बेहतर समझेंगे।
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