16 दिसंबर को पीड़िता की मां ने कपकोट थाने में आरोपी के खिलाफ तहरीर दी। इसके आधार पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता के बयान कराए तो उसने बताया कि आरोपी ने दुष्कर्म का प्रयास किया। पीड़िता के बयान के बाद विवेचक एसआई सुरभि राणा ने पोक्सो एक्ट के तहत न्यायालय में आरोपपत्र दायर किया।
विशेष लोक अभियोजक खड़क सिंह कार्की ने न्यायालय में पैरवी करते हुए सात गवाह प्रस्तुत कराए। गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश ने आरोपी को धारा 354 क में नौ वर्ष के कठोर कारावास, 354 घ में तीन वर्ष का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड, 376/511 में सात हजार का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये का अर्थदंड, 504 में दो वर्ष का कठोर कारावास और पॉक्सो एक्ट में सात साल के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित करने का फैसला सुनाया।