नोटबंदी पर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी कर रही कांग्रेस विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को बड़ा चुनावी हथियार बनाने जा रही है। वहीं भाजपा भी पलटवार को तैयार बैठी है। विमुद्रीकरण का पहला चरण 30 दिसंबर को पूरा होते ही भाजपा कांग्रेस के नोटबंदी पर सियासी दांव पेच तेज हो जाएंगे।
विज्ञापन
कुछ दिन पूर्व इस मुद्दे पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से मंत्रणा की। राहुल के ऑपरेशन नोटबंदी का मंत्र लेकर लौटे किशोर ने भी संकेत दिये कि पार्टी पचास दिन पूरे होने के बाद एग्रेसिव मोड में आ जाएगी। पार्टी के हिसाब से शुक्रवार को नोटबंदी के पचास दिन पूरे होने जा रहे हैं।
कांग्रेस के हिसाब से पीएम मोदी ने 30 दिसंबर तक नोटबंदी से उत्पन्न स्थिति के सामान्य हो जाने का भरोसा दिया था। अब कांग्रेस इसी आश्वासन को मुद्दा बनाने जा रही है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व सह प्रभारी संजय कपूर कहते हैं,‘नोटबंदी से आम आदमी परेशान है। मोदी सरकार के दावों की हवा निकल गई है। किसानों की हालत बेहद खराब है। बैंकों में अब भी लंबी-लंबी कतारें लगीं हैं। कांग्रेस ने 50 दिन इंतजार किया कि शायद हालात सामान्य हो जाएंगे, लेकिन हालात बद से बदतर हो रहे हैं और ये देश की अर्थव्यवस्था के लिए सही संकेत नहीं हैं।
विज्ञापन
कांग्रेस ने बनाया चुनावी हथियार
देहरादून में अजय माकन
- फोटो : AmarUjala
दरअसल, इस मुद्दे पर कांग्रेस शुरुआत से ही हमलावर है और पिछले दिनों उसके जितने भी केंद्रीय नेता उत्तराखंड आए सभी ने नोटबंदी पर केंद्र सरकार की मजम्मत की। अल्मोड़ा रैली में राहुल गांधी का भाषण भी नोटबंदी पर ही फोकस रहा।
अब तक पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह, अजय माकन, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेन्द्र हुड्डा व पार्टी प्रभारी अंबिका सोनी देहरादून आकर नोटबंदी पर अपने विरोध का इजहार कर चुकी हैं। कांग्रेस अब इस मुद्दे को चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के मुताबिक, नोटबंदी पर पार्टी का रोडमैप तैयार है। पार्टी हर विधानसभा में होर्डिंग्स लगाएगी जिसमें मोदी से सवाल पूछे जाएंगे कि उन्होंने सरमायेदारों से पैसा क्यों लिया? पार्टी विधानसभा चुनाव में जन-जन तक इस मुद्दे को पहुंचाएगी और नोटबंदी से पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी देगी।
कांग्रेस को कैशलेस से जवाब देगी भाजपा
ajay bhatt
- फोटो : amar ujala
नोटबंदी के फैसले और साइड इफेक्ट पर छिड़ी सियासी जंग किस करवट बैठेगी यह अब बैंकों के बाहर लगने वाली लाइनों पर निर्भर करेगी। भाजपा की बड़ी चिंता उत्तराखंड में सर्विस क्लास मतदाताओं को लेकर दिख रही है। कर्मचारियों के खाते में वेतन आते ही उसे निकालने के नियमों में बदलाव नहीं हुआ तो कांग्रेस को नया मुद्दा हाथ लग जाएगा। भाजपा इसके जवाब में कैशलेस को लेकर बड़ा प्रचार अभियान चलाने जा रही है।
भाजपा नोटबंदी को लेकर लगातार अपनी रणनीति बदल रही है। भाजपा की केंद्रीय लीडरशिप ने नोटबंदी और कैशलेस पर प्रदेश संगठन को अन्य प्रचार कार्यक्रमों के साथ जनता के बीच जाने के निर्देश दिए हैं।
भाजपा का प्रदेश नेतृत्व अपने तमाम प्रचार और कार्यकर्ता सम्मेलनों में नोटबंदी के मामले पर विशेष कार्यशालाएं लगाने का रणनीति लेकर चल रहा है। पार्टी के स्टेट लीडरशिप की सबसे बड़ी चिंता सर्विस क्लास वोटर है। उत्तराखंड में ढाई लाख सरकारी कर्मचारियों के अलावा 10 लाख सर्विस क्लास मतदाता हैं, जिनपर नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
इसके अलावा व्यापारी वर्ग और मजदूर वर्ग है, जिसके लिए भाजपा अलग से रणनीति बना रही है। पार्टी का मानना है कि बैंकों से पैसे निकालने की लिमिट में जल्द इजाफा होने जा रहा है। हालांकि कांग्रेस इस मुद्दे को कैसे भुनाती है, इसपर भाजपा की निगाहें हैं।
प्रदेश कांग्रेस का नोटबंदी को लेकर अधिक फोकस देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल जनपद पर है जहां मजदूर और निम्न आय वर्ग की संख्या सर्वाधिक है। भाजपा अब ऐसे क्षेत्रों में कैशलेस को लेकर अधिक फोकस कर रही है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि नोटबंदी अब तक का सबसे साहसिक फैसला है, जिससे कालेधन पर चोट हुई है। जनता का समर्थन भाजपा के साथ है, इसलिए साइड इफेक्ट जैसी कोई बात नहीं है। कांग्रेस लोगों को भ्रमित करने का काम कर रही है।