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आसाराम और साईं के 'अंदर' होने से 'दुकानदारी' हुई ठप

Thu, 05 Dec 2013 08:18 PM IST
नलिनी गुसाईं/अमर उजाला, देहरादून
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आसाराम के जेल जाने के बाद इनका सहस्त्रधारा रोड स्थित आश्रम लगभग सूना ही हो गया था कि अब नारायण साईं की भी गिरफ्तारी हो गई। ऐसे में यहां बचे-खुचे साधक भी खिसकने लगे हैं। यही नहीं आसपास के लोगों की दुकानदारी भी पूरी तरह से ठप हो गई है।
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लोगों ने आना ही बंद कर दिया
आसाराम की गिरफ्तारी के बाद आसाराम के आश्रम में साधक ही नहीं दिखाई दे रहे। आसपास के लोगों की माने तो यहां दो सप्ताह से सत्संग भी नहीं हुआ। धीरे-धीरे यहां लोगों ने आना ही बंद कर दिया।

इससे पहले जो सत्संग होता भी था तो आश्रम के ही कुछ साधक चुपचाप सत्संग कर लेते थे। ना ही तो पहले की तरह लाउड-स्पीकर लगाए जाते और ना ही वैसी चहल-पहल दिखती। इसका मतलब धीरे-धीरे ही सही लेकिन लोगों को भी बात समझ आने लगी है।
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यही नहीं पहले आसाराम के आश्रम के बाहर लंबी गाड़िया पहुंची सभी लोग नजदीक की दुकान पर खड़े होकर कोल्ड-ड्रिंक की बड़ी-बड़ी बोतले खरीदते, चिप्स खाते बाकि सामान की भी खरीदारी करते लेकिन जब से आसाराम गिरफ्तार हुआ है यहां कोई गाड़ी नहीं आती, दुकानदारों की माने तो लगभग दुकानदारी ठप है।

सूत्रों ने बताया कि नारायण साईं की गिरफ्तारी के बाद बृहस्पतिवार सुबह आश्रम में बचे हुए कुछ साधक भी बैग लेकर चलते बने। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम ने भी आश्रम पहुंच हाल देखा तो पूरा आश्रम सूना था। साधकों के नाम पर यहां सिर्फ दो लोग थे, जिन्होंने खुद को चंडीगढ़ का बताया और कुछ भी जानकारी होने से खुद को अंजान बताया।

दो सालों से लगातार कर रहे प्रवचन
नारायण साईं कई बार दून आए। वह जब भी दून आए आसाराम से अलग ही आए। आसाराम का मानना था कि मेरा ये शिष्य मेरे साथ प्रवचन नहीं करेगा। जहां भी आसाराम का प्रवचन हुआ नारायण साईं कभी उनके आसपास भी नहीं फटके।

आसाराम के साथ शिष्य की भूमिका में रहे सुरेशचंद्र भाई। सवाल ये भी है कि जब ये शिष्य आसाराम के साथ रह सकता था तो नारायण साईं क्यूं नहीं। नारायण ने पिछले साल मसूरी डायवर्जन कोठालगेट पर प्रवचन दिया था।

उन्होंने यहां स्वस्थ रहने के आयुर्वेदिक नुस्खे बताए थे। इससे पिछले साल उन्होंने रेसकोर्स स्थित स्वर्गापुरी आश्रम में प्रवचन किया था। आश्रम से जुड़ी तृप्ता शर्मा ने बताया कि नारायण साईं अक्सर मई-जून के महीने में ही दून आते थे।
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इस समय अधिकतर समय वह हरिद्वार बिताने आया करते थे तो इसी बीच दून के लिए भी समय निकालते थे। वह अक्सर सहस्त्रधारा रोड स्थित आश्रम में रुकते थे।
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