करीब 444.40 हेक्टेयर में फैले देश के पहले देहरादून के संरक्षित क्षेत्र आसन झील की सुरक्षा वन विभाग के निहत्थे कर्मचारियों के जिम्मे है। 10 हजार से अधिक देसी-विदेशी पक्षियों के प्रवास वाली जगह की रखवाली छह कर्मचारी करते हैं। इनके पास सामान्य स्तर वाली तीन दूरबीनें हैं, जिनसे दूर तक देख पाना संभव नहीं होता है।
विभाग के पास केवल एक बंदूक है, जिसे चलाने का अधिकार कर्मचारियों के पास नहीं है। झील के आसपास शिकारियों पर नजर रखने के लिए वॉच टावर तक नहीं है। ऐसे में झील के पक्षियों का शिकार रोक पाना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।
सुखना झील में बर्ल्डफ्लू की खबर फैलने के बाद वन विभाग ने रेंज कर्मचारियों को तीन सर्च लाइट मुहैया कराई है। आसन झील में हर साल साइबेरिया और अन्य देशों से 250 से अधिक प्रजाति के 10 हजार से अधिक विदेशी पक्षी हर साल प्रवास के लिए आते हैं, जो करीब पांच माह तक यहां रहते हैं। आसन झील पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगी है।
पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन कर्मचारियों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। पूरी रेंज में महज एक बंदूक है, जिसे चलाने का अधिकार रेंजर के पास नहीं है। झील में गश्त करने के लिए विभाग के पास बोट तक नहीं है। इसके लिए जीएमवीएन की खस्ताहाल हाल वोटों पर निर्भर रहना पड़ता है। रात के समय में जीएमवीएन की बोट भी गश्त करने के लिए कारगर नहीं है।