सफेद कोट में नायिका
भारत के आठ मेडिकल कॉलेजों में हुई स्टडी के अनुसार, युवा चिकित्सकों में धूम्रपान का प्रतिशत 17.5 के बराबर है, जो कि सामान्य वर्ग के युवाओं के 21.5 प्रतिशत से थोड़ा ही कम है। एमबीबीएस के आठ प्रतिशत और पीजी के 16.6 प्रतिशत डॉक्टर्स धूम्रपान करते पाए गए। एमबीबीएस के 16.6 और पीजी के 31.5 प्रतिशत डॉक्टर शराब सेवन में रत रहे।
भारत के ही एक अन्य अध्ययन के अनुसार (जिसमें 235 अलग-अलग प्रतिभागी शामिल रहे) केवल 18 प्रतिशत डॉक्टर ही शराब का सेवन नहीं करते पाए गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में 30 प्रतिशत डॉक्टर्स तंबाकू का सेवन करते हैं। बस केवल एक सुकून भरी बात है कि मर्यादा और परंपरा अथवा लैंगिग कारणों से व्यसनरति भारतीय महिला चिकित्सकों में अत्यंत कम है।
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असल में 2022 की डॉक्टर्स डे की थीम ‘सफेद कोट में नायक’ की सही हकदार वही हैं। यह थीम इस तरह से भी पढ़ी जा सकती है... ‘सफेद कोट में नायिका’ ताकि पुरुष डॉक्टरों में चेतावनी और स्पर्धा का एहसास हो। वो भी जन स्वास्थ्य के रोल मॉडल बनने में अपनी ली हुई शपथ निभा सकें। मद्यपान और धूम्रपान से दूर रहें। डॉ. बिधान चंद्र राय की स्मृति में मनाए जाने वाले डॉक्टर्स डे के दिन क्या ही अच्छा होता की रात ना होती, रात होती भी तो दिन की तरह उजली, जब सारे मेडिकल छात्र और डॉक्टर मद्यपान-धूम्रपान से आजीवन दूर रहने का संकल्प लेते।
(लेखक डॉ. एनएस बिष्ट मुख्यमंत्री के फिजीशियन हैं और वर्तमान में जिला कोरोनेशन अस्पताल में तैनात हैं।)