राजकीय दून अस्पताल में उपनल और पीआरडी कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से अस्पताल में मरीजों- तीमारदारों को पंजीकरण कराने के साथ ही इलाज में भी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के चलते अस्पताल के पैथोलॉजी लैब में खून की जांच तमाम जांचों में भी मरीजों को दिक्कतें आने लगी है। हालांकि राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना और अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत का कहना है कि उपनल और पीआरडी कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से मरीजों की जांच और इलाज में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं है।
हकीकत यह है कि दून अस्पताल में तैनात 610 कर्मचारियों के अचानक कार्य बहिष्कार पर जाने से मरीजों, तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कार्य बहिष्कार करने वाले उपनल कर्मचारियों ने बैठक कर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की है। आंदोलित कर्मचारियों का कहना है कि यदि 30 मार्च तक सरकार ने उपनल और पीआरडी के जरिये रखे गए कर्मचारियों की सेवाओं को जारी नहीं रखा गया तो एक अप्रैल से एकता बिहार में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और शासन की होगी।
बता दें कि राजधानी दून समेत राज्य के तमाम जिलों में कोरोना संक्रमण संकट शुरू होने के साथ ही सरकार, शासन के निर्देश पर दून अस्पताल समेत तमाम सरकारी अस्पतालों में उपनल व पीआरडी के जरिए कर्मचारियों की भर्ती की गई। अब शासन स्तर से इन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी हो गए हैं। 31 मार्च को इन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी।
पैथोलॉजी जांच में मरीजों को परेशानी
दून अस्पताल में कार्यरत उपनल कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के चलते अस्पताल में मरीजों तीमारदारों को पंजीकरण के साथ ही दवा लेने तक में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों के बहिष्कार बहिष्कार के चलते जहां मरीजों को पंजीकरण कराने के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ रही है वहीं डॉक्टरों को दिखाने के बाद दवाइयों के लिए लंबी कतार लगानी पड़ रही है। फिलहाल बेहद कम संख्या में कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है।
दून अस्पताल में उपनल और पीआरडी के जरिए ड्यूटी पर लगाए गए कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का अधिकार सरकार और शासन स्तर से लिया गया है। इसमें मेडिकल कॉलेज प्रशासन के स्तर पर कुछ भी नहीं किया जा सकता है। सरकार, शासन के स्तर पर एक बार पीआरडी कर्मचारियों की दिक्कतों को देखते हुए एक माह की कार्य बढ़ाने का फैसला लिया गया था। फिलहाल 31 मार्च के बाद उपनलकर्मी ड्यूटी पर रहेंगे या नहीं? इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार, शासन स्तर पर ही लिया जाएगा।
डॉ. आशुतोष सयाना, प्राचार्य, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज