फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amar Ujala Exclusive: भारत-चीन सीमा से लगे हर्षिल में सेना को युद्धाभ्यास के लिए मिलेगी 477 एकड़ जमीन

Sun, 27 Nov 2022 06:18 AM IST
रेनू सकलानी अजय कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी

सार

आपातकाल में जगह की कमी के चलते यहां सेना को युद्धाभ्यास के साथ अस्थाई शिविर स्थापित करने में भी दिक्कत होता है। इसी कारण सेना ने यहां वन भूमि हस्तांतरण के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव सौंपा था। वन क्षेत्राधिकारी गंगोत्री रेंज राहुल पंवार ने बताया कि सेना को हस्तांतरित होने वाली कुल वनभूमि 476.75 एकड़ है जो अलग-अलग टुकड़ों में है।
विज्ञापन
harshil - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत-चीन सीमा से लगे उत्तरकाशी जनपद के हर्षिल में भारतीय सेना को युद्धाभ्यास के लिए 476.75 एकड़ जमीन मिलने जा रही है। सेना के प्रस्ताव पर यहां वन विभाग और सेना के बीच आरक्षित वनभूमि हस्तांतरण की कार्रवाई चल रही है। अगले चार-पांच माह में हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

विज्ञापन


हर्षिल में सेना की एक बटालियन तैनात है जो कि तीन-तीन वर्ष के अंतराल पर बदलती रहती है। आपातकाल में जगह की कमी के चलते यहां सेना को युद्धाभ्यास के साथ अस्थाई शिविर स्थापित करने में भी दिक्कत होता है। इसी कारण सेना ने यहां वन भूमि हस्तांतरण के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव सौंपा था। वन क्षेत्राधिकारी गंगोत्री रेंज राहुल पंवार ने बताया कि सेना को हस्तांतरित होने वाली कुल वनभूमि 476.75 एकड़ है जो अलग-अलग टुकड़ों में है। अगस्त माह से इस वनभूमि पर लगे पेड़ों की गिनती की जा रही है।

नहीं काटा जाएगा एक भी पेड़ 
डीएफओ पुनीत तोमर के अनुसार हस्तांतरण प्रक्रिया मार्च-अप्रैल 2023 तक पूरी कर ली जाएगी।   इस वन भूमि पर एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। इसके लिए पेड़ों की गणना करवाई जा रही है। गणना में समय लग रहा है।
विज्ञापन

 

विज्ञापन

हर्षिल वन पंचायत ने जताई आपत्ति
हर्षिल वन पंचायत ने वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। वन पंचायत के अध्यक्ष माधवेंद्र रावत का कहना है कि वन पंचायत को इसकी जानकारी नहीं दी गई है। एनओसी भी नहीं ली गई है। हर्षिल में वन पंचायत की 124 हेक्टेयर जमीन है। स्थानीय ग्रामीणों को भरोसे में लिए बिना वन भूमि हस्तांतरण से ग्रामीणों के हक-हकूक प्रभावित होंगे। इसमें गौचर, लकड़ी व घास लाने के रास्ते प्रभावित होंगे।

ये भी पढ़ें...Uttarakhand: एक क्लिक पर मिलेगी मेडिकल हिस्ट्री, 28 लाख लोगों ने 'आभा' को चुना, दस्तावेज संभालने का झंझट खत्म
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें