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सेना अभ्यास के लिए उत्तराखंड है ‘खास’

Mon, 01 Dec 2014 03:13 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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सामरिक दृष्टि से भी सेना के लिए उत्तराखंड में नई फील्ड फायरिंग रेंज की स्थापना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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चीन (तिब्बत) के साथ उत्तराखंड की 350 किलोमीटर लंबी सीमा है। चीन के सीमा पार पांच हवाई अड्डे, ल्हासा तक रेलवे लाइन (जिसका बॉर्डर तक निर्माण लगभग पूरा हो चुका है) है।

इसके अलावा चीन सड़कों का जाल पूरे तिब्बत में सीमा तक फैला चुका है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक चीन के पांच सैन्य माउंटेन डिवीजन सीमा के उस पार तैनात हैं। जबकि चीन सीमा के साथ पर्वतीय इलाके में कोई बड़ी फील्ड फायरिंग रेंज नहीं है, जिससे उत्तराखंड में नई रेंज की जरूरत है।
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वहीं, चीन से सटी सीमा के चलते भारतीय सेना के लिए उत्तराखंड के पर्वतीय इलाके तोपों के अभ्यास के लिए सबसे बेहतरीन माने जा रहे हैं।
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उत्तराखंड का पर्वतीय इलाका अभ्यास के लिए उपयुक्त

सेना 10 हजार फीट की ऊंचाई को अपनी आर्टिलरी गन के लिए बेहतरीन मान रही है। फील्ड फायरिंग रेंज में मोर्टार से लेकर 135 और 155 मिलीमीटर कैलिबर की तोपों का अभ्यास होता है।

सेना बड़ी संख्या में हल्की और मध्यम कैलिबर की सेल्फ प्रोफेल्ड (स्व संचालित) और मैनुअल तोपें खरीद रहा है। ऐसे में चीन सीमा की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड का पर्वतीय इलाका उपयुक्त माना जा रहा है।

उत्तराखंड में चीन की घुसपैठ
उत्तराखंड में चीन की ओर से बीते पांच वर्ष में 37 बार घुसपैठ और वर्ष 2014 में दो बार हवाई घुसपैठ हो चुकी है।

सेना को राज्य में चाहिए और संसाधन
- बार्डर पर निगरानी के लिए नहीं है कोई सैन्य हवाई अड्डा
- राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 23 हजार एकड़ भूमि
- 19 संवेदनशील सीमांत सड़कों का निर्माण जल्द
- सैन्य परियोजनाओं के लिए वन विभाग की एनओसी में तेजी
- पंतनगर में यूएवी बेस निर्माण को 100 एकड़ भूमि
- सीमांत क्षेत्रों में 67 हैलीपेड बनाने का प्रस्ताव
- सैन्य लिहाज से महत्वपूर्ण कर्णप्रयाग रेलवे लाइन
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