राजधानी देहरादून में मिट्ठी बेहड़ी के बाद अब जैंतनवाला के लोगों के लिए सेना परेशानी का सबब बन गई है। मंगलवार को एक निजी भूमि पर भवन निर्माण रोकने पहुंची सेना की टीम का स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया।
सैन्य अधिकारी का कहना था कि रक्षा भूमि के पास पांच सौ मीटर के दायरे में सिविल भूमि पर निर्माण के लिए सब एरिया मुख्यालय की अनुमति लेनी होगी। इस घटना पर जिला प्रशासन ने सख्त एतराज किया है।
स्थानीय लोगों का विरोध
डीएम बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि इस संबंध में सेना के आला अधिकारियों को पत्र लिखेंगे। उन्हें कोई भी कार्रवाई प्रशासन के संज्ञान में लाकर ही करनी चाहिए। जैंतनवाला में निर्माण रोकने गई सेना की टीम का स्थानीय लोग विरोध कर रहे थे। तभी स्थानीय नेत्री गोदावरी थापली के मौके पर पहुंचने से जनता का मनोबल और बढ़ गया।
इसके बाद उन्होंने सेना के खिलाफ हंगामा किया। स्थानीय निवासी कविता खत्री और पूनम नेगी ने बताया कि सेना आए दिन मनमानी करती रहती है। इस वजह से स्थानीय लोगों को जीना दूभर हो गया है। जनता के विरोध के बाद एडीएम हरक सिंह रावत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
मामले के निस्तारण की मांग
मामले में स्थानीय विधायक गणेश जोशी ने भी कड़ी आपत्ति जताते हुए जिलाधिकारी से मामले के निस्तारण की मांग की है। इससे पहले भी सेना ने इसी क्षेत्र में बिजली के खंभे उखाड़ दिये थे। जिलाधिकारी का कहना है कि सेना गलत कर रही है। सेना को पहले जिला प्रशासन से संपर्क करना चाहिए था। सेना के लोगों को इस तरह से जनता को डराना धमकाना नहीं चाहिए।
नहीं लागू होता 100 मीटर का दायरा
जैंतनवाला में सेना ने आवासीय निर्माण पर रोक के लिए बाउंड्री पिलर से 100 मीटर को वर्जित क्षेत्र घोषित किया है, जबकि रक्षा भूमि नीति के तहत यह दूरी रक्षा संस्थान (डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट) से होनी चाहिए, न कि सीमा स्तंभ से। ऐसे में जिला प्रशासन ने सेना की मांग पर क्षेत्र को निर्माण के लिए वर्जित कैसे किया, यह भी स्पष्ट नहीं है।
समाधान नहीं तो प्रदर्शन
मसूरी विधायक गणेश जोशी जैंतनवाला, पुरोहितवाला, चांदमारी आदि क्षेत्रों की समस्याओं के संबंध में जिलाधिकारी से मिले। उन्होंने कहा कि सैन्य क्षेत्र में निवास कर रहे ग्रामीणों को लगातार परेशान किया जा रहा है। अगर 15 दिन के अंदर समस्याओं का निराकरण नहीं होता तो क्षेत्रवासी सेना के खिलाफ प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे।
रक्षा भूमि नीति में तय प्रावधान
सैन्य संस्थान के साथ सिविल भूमि के लिए कैंट एक्ट 2006, अधिसूचित क्षेत्र या वर्क्स ऑफ डिफेंस एक्ट लागू है। इन सभी प्रावधानों के अलावा अगर कोई निजी भूमि सैन्य संस्थान से लगती हो तो उसके लिए नई रक्षा भूमि नीति लागू होती है, जिसके दिशा निर्देश 2011 में जारी किये गए हैं। नीति के तहत सैन्य संस्थान से 100 मीटर पर एक मंजिला और पांच सौ मीटर पर बहुमंजिला भवन सिविल निर्माण के लिए सेना की एनओसी जरूरी है।