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सेना की फायरिंग रेंज से दहशत में ग्रामीण

Tue, 22 Apr 2014 01:37 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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गढ़ी कैंट में सेना की अनारवाला स्थिति फायरिंग रेंज में सैन्य अभ्यास से साथ लगते बिष्ट और चौंरा गांव में कुछ मकानों पर गोलियां लगी हैं। फायरिंग रेंज में जब भी सेना अभ्यास करती है तो लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो जाते हैं।
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विधायक गणेश जोशी ने मामले को जिलाधिकारी के समक्ष उठाया है हालांकि सब एरिया को मामले की सूचना तक नहीं दी गई है।

सेना के मुताबिक उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। गौरतलब है कि आजादी के तुरंत बाद की फायरिंग रेंज अधिसूचित है, जिसमें सुरक्षा मानकों का हर पांच वर्ष बाद निरीक्षण होता है।

मकानों पर लग रही है गोलियां

गांववालों का तो आरोप है कि मकानों पर गोलियां लगने का सिलसिला कुछ माह से अधिक हो गया है। पंचायत सदस्य दीपक पुंडीर का कहना है कि 18 अप्रैल को दोपहर के समय कई गोलियां गांव में आई और साथ लगते चौरी गांव के दिनेश चंद्र बढ़ोयी के घर के उपर पानी की टंकी में छेद कर दूसरी और निकल गई।

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गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है, जिसके लिए थाना राजपुर में शिकायत भी दी गई है। गांववालों ने विधायक गणेश जोशी को इस संबंध में शिकायत दी है।

विधायक जोशी ने बताया कि यह बेहद चिंता की विषय है जिसे जिलाधिकारी को अवगत करवा दिया है। जिलाधिकारी स्वयं सेना से इस संबंध में वार्ता कर सेना के खिलाफ कार्यवाही करे जिससे जनता में दहशत कम हो सके।

आरोप: पूर्व में हो चुकी है मौत भी

इस क्षेत्र में सेना की गोली से दो मौतें होने की बात भी गांव वाले कर रहे हैं। 17 अक्टूबर 1968 को चौंरा गांव की सुवारी देवी की मौत हुई है।

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उनके बेटे प्रेम सिंह ने बताया कि खेत में काम कर रही थी जब उनकी मौत गोली लगने से हुई।

एक अन्य महिला सविता देवी की मौत 1971 में फायरिंग रेंज से की गोली से लगने का दावा भी गांव वाला ने किया।
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सुरक्षा मानक पूरे हैं रेंज के

गढ़ी कैंट स्थित अनारावाला एवं अन्य फायरिंग रेंज अधिसूचित हैं। फायरिंग की अधिसूचना सुरक्षा मानकों को पूरा करने पर ही जारी की जाती है।

सेना के मुताबिक फायरिंग रेंज में जब भी अभ्यास होता है तो उसकी एक ड्रिल होती है जिसे अनिवार्य रूप से किया जाता है। सिविल प्रशासन को इस संबंध में अवगत करवाने के साथ क्षेत्र में सेना के जवान तैनात किये जाते हैं ताकि क्षेत्र में कोई सिविलियन प्रवेश कर दुर्घटना का शिकार नहीं हो सके।

कई दशकों से फायरिंग रेंज का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन ऐसी किसी घटना की शिकायत सब एरिया मुख्यालय के पास नहीं आई है।
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