हत्या से एक दिन पहले दोनों से मिला था संजय
जिस दिन मंजेश की हत्या हुई उससे एक दिन पहले ही संजय उर्फ फौजी अर्जुन और सचिन से मिला था। इस मुलाकात में उसने दोनों को खर्चे के लिए दस हजार रुपये दिए थे। अगले दिन कुछ और पैसे देने को कहा था। हत्या की शाम दोबारा फिर तीनों आपस में मिले। यहां संजय ने दो-चार दिन में पेमेंट आने के बाद पूरा पेमेंट एक साथ करने का भरोसा दिया। इस पर अर्जुन राजी हो गया और दोनों ने उसी रात मंजेश को पार्टी के बहाने बुलाकर उसकी हत्या कर दी।
कार चलानी ना आने के कारण रात को शव ठिकाने नहीं लगा पाए थे आरोपी
शनिवार की रात मंजेश की हत्या करने के बाद आरोपी अर्जुन और सचिन उसके शव को ठिकाने लगाना चाहते थे। लेकिन दोनों में से किसी को भी गाड़ी चलानी नहीं आती थी। इसके कारण वह शव को ठिकाने नहीं लगा पाए। इसके लिए उन्होंने अपने एक ओर साथी की मदद को हाथ बढ़ाया था। लेकिन उसने इस साजिश में शामिल होने के लिए इंकार कर दिया। घटना की रात जब दोनों ने मंजेश की हत्या की तो इसके बाद शव को ठिकाने लगाने का प्रयास किया। दोनों पर कार चलानी नहीं आती थी, इसके कारण अर्जुन ने अपने एक साथी शुभम को घटना को बारे में बताया और शव को ठिकाने लगाने के लिए मदद के लिए कहा। लेकिन उसने इंकार कर दिया। मंजेश की हत्या करने के बाद अर्जुन ने मृतक के गले से चेन, अंगूठी और गाड़ी की चाबी अपने पास रख ली थी। रात को जब शव ठिकाने नहीं लग पाया तो सुबह दोनों इसका प्रयास कर रहे थे, लेकिन अचानक पुलिस के आने पर दोनो छत से नीचे कूदकर फरार हो गए।
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हत्या के बाद संजय ने अर्जुन को दिए थे 50 हजार रुपये
हत्या के बाद अगली सुबह जब आरोपी अर्जुन सुपारी देने वाले संजय उर्फ फौजी से मिला तो उसने हत्या कराने के बारे में बताकर मृतक मंजेश की कार की चाबी उसे दे दी। इस पर संजय उर्फ फौजी ने आरोपी अर्जुन को 50 हजार रुपये दिए और अपनी कार से ही ग्राफिक एरा अस्पताल झाझरा के पास छोड़ दिया। जहां से अर्जुन अपने साथी अफजल के कमरे में चला गया और एक दिन वहां रुकने के बाद अफजल को मृतक मंजेश की चैन, अंगूठी देकर वहां से हरियाणा चला गया। यहां से हरियाणा के लिए निकला तो तभी उसे सचिन की गिरफ्तारी के बारे में पता चल गया। तभी अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए सोनीपत कोर्ट में सरेंडर करने की योजना बनाई।I