डॉ. सोना कौशल गुप्ता ने बताया कि तनाव बढ़ने पर हमारे दिमाग से कोर्टेसोल नाम का एक रसायन तेजी से निकलता है, जिससे व्यक्ति भूलने लगता है। सिर या शरीर में दर्द, भूख न लगना, नींद न आना, डर व घबराहट जैसे लक्षणों से इसकी पहचान होती है। परीक्षा के दौरान तनाव लेने वाले बच्चों में यह लक्षण अक्सर देखे जाते हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो समझिये बच्चे को मदद की जरूरत है।
एक्शन पर रिएक्शन नहीं रिस्पांस करें
उन्होंने बताया कि बच्चे के किसी एक्शन पर रिएक्शन की बजाय अभिभावकों को रिस्पांस करना चाहिए। रिएक्शन का मतलब है, जैसा बच्चे ने किया वैसे ही जवाब देना। इसका मतलब हुआ कि बच्चा अगर जोर से चीख के कोई बात कहे तो आप भी वैसे ही चिल्लाकर जवाब दें। इससे बचना चाहिए। इसके बजाय आप बच्चे की किसी भी बात पर शांत होकर जवाब दें। इससे बच्चे के अंदर भी उसी तरह के गुण विकसित होंगे।
तनाव घटाने को लें गहरी सांस
तनाव घटाने और नियंत्रित करने में गहरी सांस लेना फायदेमंद होता है। एक से छह गिनते हुए सांस अंदर लें। एक से छह गिनने तक रोकें और फिर एक से छह गिनते हुए धीरे-धीरे छोड़ दें। ऐसा कम से 10 बार करें। इससे तनाव के स्तर में कमी आती है। थकान होने पर भी ऐसा करें। रोजाना ऐसा करने से नियमित तनाव कम होता है।
-हर वक्त बच्चे के सिर पर न बैठे रहें। उसे अपने लिए भी स्पेस और समय दें।
-परीक्षा के दौरान घंटों पढ़ने की बजाय बच्चे में साल भर नियमित पढ़ने की आदत डालें।
-बच्चे को गलत परिणाम की आशंका दिखाकर मत डराएं, इससे बच्चे में तनाव बढ़ता है।
-बच्चे की खुद से या किसी अन्य से तुलना न करें। याद रखें, हर बच्चा अलग होता है।
-अभिभावक धैर्यवान बनें। बच्चे की बात सुनें और डांटने या झगड़ने की बजाय शांतिपूर्वक उसकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करें।
-घर में लड़ाई-झगड़े या गुस्से की बजाय हंसी-खुशी का माहौल बनाकर रखें।
-पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे के स्वास्थ्य और खानपान का ध्यान भी रखें।
-अभिभावक अपने सपने बच्चों पर न थोपें। उनकी पसंद का भी ध्यान रखें।
-बच्चे के सामने केवल घर की समस्याओं या आर्थिक संकट का रोना न रोएं। उन्हें प्यार से समझाएं।
-बच्चों को हमेशा बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करते रहें।
-लगातार मेहनत करते रहें। परिणाम को लेकर तनाव न लें।
-तनाव से परफॉरमेंस पर असर पड़ता है। तनाव जितना कम लेंगे रिजल्ट बेहतर होगा।
-किसी भी चीज को लेकर हीन भावना न आने दें। खुद को दोष न दें। खुद से प्यार करें।
संवाद में यह अभिभावक व छात्राएं रहीं मौजूद
सुषमा गुसांई, मीना बोहरा, लक्ष्मी चौहान, गुड्डी देवी, विरमा चौहान, सविता चौधरी, अर्चना चौधरी, वंदना सिंह, नेहा, निकिता, आयशा खान, मलिक हबीबा, नशरा, उमा, सिया जोशी, भवानी, प्रिया, ज्योति पासवान, संगीता, प्रियंका, अनिता पासवान, सोनी, निशान शर्मा, सारिका जयसवाल, मधु जैन, रमेश पैन्यूली और अन्य।