देशभर में महिलाओं के खिलाफ हो रहे यौन अपराधों पर दून में भी गुस्सा है। बलात्कार और यौन हिंसा जैसे जघन्य अपराध में लिप्त अपराधियों को सख्त सजा देने की मांग उठ रही है। आज यौन हिंसा के इन मामलों से लड़ते हुए खुद को कैसे सुरक्षित रखें, यह जानना हर महिला के लिए जरूरी हो गया है।
अमर उजाला अपराजिता संवाद में मंगलवार को छात्राओं को यौन हिंसा से लड़ने के यही सूत्र दिए गए। छात्राओं को बताया गया कि कैसे वह यौन हिंसा के मामलों में कानूनी मदद लेते हुए दोषियों को उनके किए की सजा दिलवा सकती हैं।
मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय पटेलनगर में समाधान एनजीओ संचालक व यौन हिंसा की शिकार महिलाओं को मदद उपलब्ध कराने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रेनू डी सिंह ने छात्राओं को आवश्यक जानकारियां प्रदान की। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के अपराध से लड़ने के लिए पूरे समाज को एकजुट होकर आगे आना होगा।
महिलाओं के प्रति जिस तरह के अपराध हो रहे हैं, उसके लिए कमजोर कानून भी कम जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक जांच की प्रक्रिया भ्रष्टाचार मुक्त नहीं होती, तब तक फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी फायदा नहीं है। तुरंत या जल्दी सजा देने की चाह में किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो, यह भी देखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख होना चाहिए लेकिन मेल फोबिया भी ठीक नहीं है। याद रखिये समाज में हर व्यक्ति खराब ही हो, ऐसा नहीं है। बलात्कार को इज्जत से जोड़ना भी ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी बीमार मानसिकता वाले व्यक्ति के कुकृत्य की सजा पीड़िता या उसके परिवार को नहीं दी जानी चाहिए।
कार्यक्रम में विप्लवी मालाकर, शैली शर्मा, अचला ढौंडियाल, तनुजा पाल, प्रेरणा आर्या, अंजली ठाकुर, किरन, मानसी राणा, सुष्मिता डोटियाल, वैष्णवी विंद्रु, मेहजबीन सिद्दकी, प्रेरणा सागर, मानसी शर्मा, मुस्कान पांडे, इरम त्यागी और निशी भाटिया भी मौजूद रहीं।