फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

#कबतकनिर्भया : अपराजिताओं को दिए यौन हिंसा से लड़ने के सूत्र, कहा - सबको आना होगा आगे

Wed, 04 Dec 2019 10:20 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • अमर उजाला अपराजिता संवाद में विशेषज्ञ ने यौन हिंसा के मामलों में आवाज उठाने का किया आह्वान
  • छात्राओं ने देशभर में महिलाओं के साथ हो रही घटनाओं पर जताया रोष, कहा विरोध में सबको आना होगा आगे
विज्ञापन
संवाद में मौजूद छात्र व छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देशभर में महिलाओं के खिलाफ हो रहे यौन अपराधों पर दून में भी गुस्सा है। बलात्कार और यौन हिंसा जैसे जघन्य अपराध में लिप्त अपराधियों को सख्त सजा देने की मांग उठ रही है। आज यौन हिंसा के इन मामलों से लड़ते हुए खुद को कैसे सुरक्षित रखें, यह जानना हर महिला के लिए जरूरी हो गया है।

विज्ञापन


अमर उजाला अपराजिता संवाद में मंगलवार को छात्राओं को यौन हिंसा से लड़ने के यही सूत्र दिए गए। छात्राओं को बताया गया कि कैसे वह यौन हिंसा के मामलों में कानूनी मदद लेते हुए दोषियों को उनके किए की सजा दिलवा सकती हैं।

मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय पटेलनगर में समाधान एनजीओ संचालक व यौन हिंसा की शिकार महिलाओं को मदद उपलब्ध कराने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रेनू डी सिंह ने छात्राओं को आवश्यक जानकारियां प्रदान की। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के अपराध से लड़ने के लिए पूरे समाज को एकजुट होकर आगे आना होगा।
विज्ञापन


महिलाओं के प्रति जिस तरह के अपराध हो रहे हैं, उसके लिए कमजोर कानून भी कम जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक जांच की प्रक्रिया भ्रष्टाचार मुक्त नहीं होती, तब तक फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी फायदा नहीं है। तुरंत या जल्दी सजा देने की चाह में किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो, यह भी देखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख होना चाहिए लेकिन मेल फोबिया भी ठीक नहीं है। याद रखिये समाज में हर व्यक्ति खराब ही हो, ऐसा नहीं है। बलात्कार को इज्जत से जोड़ना भी ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी बीमार मानसिकता वाले व्यक्ति के कुकृत्य की सजा पीड़िता या उसके परिवार को नहीं दी जानी चाहिए।

कार्यक्रम में विप्लवी मालाकर, शैली शर्मा, अचला ढौंडियाल, तनुजा पाल, प्रेरणा आर्या, अंजली ठाकुर, किरन, मानसी राणा, सुष्मिता डोटियाल, वैष्णवी विंद्रु, मेहजबीन सिद्दकी, प्रेरणा सागर, मानसी शर्मा, मुस्कान पांडे, इरम त्यागी और निशी भाटिया भी मौजूद रहीं। 

यौन हिंसा से लड़ने के सूत्र

हेल्पलाइन से लें मदद

यौन हिंसा के मामलों से बचाव और तुरंत मदद पाने के लिए हेल्पलाइन फायदेमंद साबित हो सकती है। ज्यादातर हेल्पलाइन ऐसे प्रकरणों में पीड़िता की पहचान गुप्त रखते हुए मदद उपलब्ध कराती है। पीड़िता को पुलिस और कानूनी मदद के साथ ही काउंसिंलिंग दिलाने की व्यवस्था भी रहती है। सरकारी हेल्पलाइन 1090 के अलावा कई सामाजिक व निजी संगठनों की हेल्पलाइन से भी मदद ली जा सकती है।

बच्चों को यौन शिक्षा जरूरी

भारत में अभी यौन शिक्षा का दायरा बेहत सीमित है। लेकिन बच्चों को समय के साथ यौन शिक्षा देना जरूरी होता जा रहा है। बच्चे गुड और बैड टच को समझें। हार्मोनल बदलाव, यौन अपराध, लैगिंक हिंसा की जानकारी उन्हें होनी चाहिए। जानकारी न होने पर कई बार बच्चे दोस्तों या घर से बाहर इसे समझने की कोशिश करते हैं, जिससे वह यौन हिंसा या अन्य तरह के अपराधों के शिकार हो जाते हैं।

शिक्षित समाज से सुधरेंगे हालात

अपराधों से लड़ने में शिक्षा बेहद अहम हथियार है। शिक्षित समाज को अपेक्षाकृत सभ्य माना जाता है। इसमें स्कूली शिक्षा के साथ ही नैतिक शिक्षा और संस्कार भी शामिल हैं, जो हमें बेहतर इंसान बनने में मदद करते हैं। एक शिक्षित व्यक्ति हमेशा अपराध के खिलाफ खड़ा रहता है। 

गलत मनोरंजन छोड़ें

अपराधों को बढ़ावा देने वाली फिल्मों, धारावाहिक और गीतों का बहिष्कार करने की जरूरत है। कई बालीवुड गीतों की भाषा बेहद अश्लील और फूहड़ है, जो लोगों को गलत काम करने के लिए उकसाती है। नायिका के साथ छेड़छाड़ और बदतमीजी करने वाले को फिल्मी पर्दे पर हीरो बनाकर पेश किया जाता है। कई बार इसको देखकर युवाओं के मन पर गलत प्रभाव पड़ता है। इन पर रोक लगाने की जरूरत है। 

आवाज जरूर उठाएं

यौन हिंसा से लड़ने के लिए जरूरी है कि उसके खिलाफ आवाज उठाई जाए। चाहे कोई राह चलते फब्तियां कसे या किसी भी तरह की छेड़छाड़ करे। कभी चुप न रहें। तुरंत विरोध करें। याद रखिये अपराधी का हौसला हमेशा तब बढ़ता है, जब पीड़ित चुप रहे। मदद के लिए चिल्लाएं, आस-पास के लोगों को इकट्ठा करें। वूमन हेल्पलाइन 1090 या इमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल कर मदद मांगें। 

बेटियों को बनाएं सबल

किसी भी तरह के अपराध से बेटियों को सुरक्षित रखने का सबसे आसान और महत्वपूर्ण तरीका है कि उन्हें सबल बनाया जाए। बेटियों को शुरूआत से आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जाए। घर हो या बाहर, हर तरह के अपराध से लड़ने के लिए उन्हें तैयार रखिये। बेटियां मजबूत और सशक्त होंगी तो यकीन मानिये अपराधी कुछ भी करने से पहले हजार बार सोचेंगे।
विज्ञापन

बेटियों ने कहीं यह बातें: 

 सेक्स एजुकेशन पर बात करने से आज भी लोग हिचकिचाते है। जबकि इस पर खुलकर बात करने की जरूरत है और यह बात लड़कियों को बचपन में ही बतानी चाहिए। कई बार माता-पिता ही इससे हिचकिचाते है। ऐसे में स्कूल से यह पहल की जानी चाहिए। अनिवार्य रूप से स्कूलों में लड़कियों को गुड टच और बैड टच के बारे में पता होना चाहिए। अगर शुरू से ही हमें गुड टच और बैड टच पता हो तो बहुत सी चीजों को पहले ही रोका जा सकता है। 
- मानसी, एसजीआरआर यूनिवर्सिटी 

लड़कियों की सीमाएं तय कर दी जाती है, लेकिन सीमाएं हमारी तय की जरूरत नहीं है। जब भी किसी लड़की के साथ गलत होता है तो सारे नियम लागू हम पर किए जाते है। रात को घर जल्दी आना, कपड़े ठीक से पहनना, ज्यादा दोस्तों के साथ न रहना। इससे तो ऐसा लगता है कि गलत हमने किया है। 
- शाहीनबानो, एसजीआरआर

हैदराबाद में जो एक बेटी के साथ हुआ उससे सभी लोगों में आक्रोश है, लेकिन यह एक बड़ी हकीकत है कि यह हल्ला कुछ दिनों तक होता है। लोग सुनते है और फिर कुछ दिनों बाद सब अपने में व्यस्त हो जाते है। लोगों का गुस्सा देख एक बार मामले का संज्ञान ले भी लिया जाता है, तो जब तक उस पर फैसले का समय आता है तब तक हमारे लोगों का गुस्सा भी शांत हो जाता है। और मामला फिर ठंडा पड़ जाता है। इसलिए पहले लोगों को भी इस संवेदनसील मुद्दे के गहरायी को समझने की जरूरत है।
- वैष्णवी, एसजीआरआज कालेज

लड़कियों के मामले कई बार पुलिस भी गंभीरता नहीं दिखाती है। जिस कारण अपराधियों में कानून का डर नहीं होता है। कानून का खौफ न होना हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है। इसलिए पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने के साथ कानून को भी सख्त होने की जरूरत है। 
- इरम त्यागी, एसजीआरआर यूनिवर्सिटी

हर वार्ड में एक हेल्पलाइन होनी चाहिए, ताकि किसी भी वक्त जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके। इसके अलावा हर जगह लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। उनकी निर्भरता यह नहीं होनी चाहिए कि कोई उनकी मदद के लिए आएगा। बल्कि उन्हें इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वह अपनी मदद स्वयं करें।
- निशा भाटिया, एसजीआरआर यूनिवर्सिटी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें