राजधानी देहरादून में अपनी बीवी के 72 टुकड़े कर डीप फ्रीजर में रखने वाला पति राजेश गुलाटी अब ज्ञान बांटेगा।
जेल में राजेश गुलाटी साथी कैदियों को गणित पढ़ाएगा। सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे राजेश को इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने जेल में अपना काउंसलर बनाया है।
उस पर कैदियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी देने और पढ़ाने की जिम्मेदारी है। दिसंबर 2010 में पुलिस समेत आम जनता को हिला देने वाले अनुपमा हत्याकांड का खुलासा हुआ था।
तब से आरोपी और अनुपमा का पति राजेश गुलाटी सुद्धोवाला जेल में बंद है।
250 कैदियों ने विभिन्न कोर्स के लिए किया आवेदन
हाल में इग्नू ने जेल परिसर में कैंप लगाया, जहां 250 कैदियों ने विवि के विभिन्न कोर्स के लिए आवेदन लिया है।
इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डा. एके डिमरी ने बताया कि कैदियों में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए अच्छा रुझान दिखा। बताया कि जेल में कई उच्चशिक्षित कैदी भी हैं।
ये कैदी बाकी कैदियों को कोर्स की जानकारी देने के अलावा उन्हें पढ़ाने में भी मददगार हो सकते हैं। डॉ. डिमरी ने बताया कि ऐसे कैदियों में राजेश गुलाटी भी शामिल है। इग्नू ने राजेश को अपना काउंसलर बना दिया है।
वह कैदियों को गणित और कंप्यूटर की शिक्षा प्रदान करेगा। हर काउंसिलिंग के लिए उसे 750 रुपए दिए जाएंगे। डॉ. डिमरी ने बताया कि कैदियों की पढ़ाई के अलावा परीक्षाएं भी जेल परिसर में ही आयोजित की जाएंगी।
पीएचडी कैदी भी काउंसलर
सुद्धोवाला जेल में कई पीएचडी धारक और इंजीनियर बंदी मौजूद हैं। इग्नू ने राजेश गुलाटी के अलावा इन सभी कैदियों को भी काउंसलर बनाया है।
सभी कैदियों को अलग-अलग विषय पढ़ाएंगे। इसके एवज में उन्हें इग्नू की ओर से पैसा दिया जाएगा।
इन कोर्स की कैदियों में मांग
डॉ. डिमरी ने बताया कि अधिकतर कैदियों ने सर्टिफिकेट इन फूड एंड न्यूट्रीशियन, बैचलर प्रीपेरेटरी प्रोग्राम के अलावा बीए, बीकॉम और बैचलर इन सोशल वर्क के लिए फॉर्म खरीदा है।
कुछ ने बीसीए तो कुछ ने आपदा प्रबंधन कोर्स में भी रुचि दिखाई है।
बेरोजगारी में भी की अच्छी कमाई
आईआईटी से पासआउट राजेश गुलाटी अमेरिका की एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे ओहदे पर कार्यरत था। वर्ष 2008-09 में आई वैश्विक मंदी ने राजेश की नौकरी छीन ली थी।
बेरोजगार होने के बाद राजेश पत्नी और बच्चों को लेकर देहरादून आ गया था। यहां भी उसे नौकरी नहीं मिली। इसके बावजूद अपने हुनर के दम पर वह अच्छी कमाई कर लेता था।
राजेश घर पर ही रहकर ऑनलाइन काम किया करता था, जिसके लिए उसे प्रतिमाह 30 से 40 हजार रुपए मिल जाते थे।
जेल से छूटकर भी करें पढ़ाई
डॉ. डिमरी ने बताया कि कैदियों की आय का कोई जरिया नहीं होता, लिहाजा इग्नू उन्हें निशुल्क शिक्षा एवं पाठ्यसामग्री उपलब्ध कराता है।
कैदी जेल से छूटने के बाद भी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एनआर राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होते ही कैदियों को स्टडी मैटेरियल उपलब्ध करा दिया जाएगा।
पत्नी के शव के किए थे 72 टुकड़े
14 दिसंबर 2010 को हत्याकांड के खुलासे के बाद उसी दिन राजेश गुलाटी को गिरफ्तार कर लिया गया था।
राजेश ने 17 अक्तूबर 2010 को पत्नी की हत्या कर दी थी। आरोप था कि राजेश ने दो माह तक शव को घर में डीप फ्रीजर में रखा था और स्टोन कटर से टुकड़े कर धीरे-धीरे ठिकाने लगा रहा था।
राजेश पर शव के 72 टुकड़े करने का आरोप था। उसकी निशानदेही पर मसूरी रोड पर मालसी के जंगल से अनुपमा का पैर बरामद किया गया था।
राजेश के दोनों बच्चों की कस्टडी अनुपमा के भाई एसके प्रधान हासिल कर चुके हैं। जुड़वां बच्चे सोनाक्षी और सिद्धांत अब दिल्ली में रह रहे हैं।
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