जीजीआईसी घमंडपुर में 11वीं विज्ञान वर्ग (पीसीएम ग्रुप) की मेधावी छात्रा अनुजा डुकलान को द ग्लोबल बायो बिजनेस फोरम (बायोएशिया) ने हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में यंग माइंड अवॉर्ड-2014 से नवाजा है।
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यह अवॉर्ड उसे कैक्टस प्रजाति के एक पौधे यूफोरबिया रॉयलीना से एंटी वैक्टिरिया टर्पिनॉयड के आविष्कार के लिए दिया गया।
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बाल वैज्ञानिक की इस उपलब्धि ने उत्तराखंड का भी नाम रोशन किया है। अनुजा ने इसके प्रोविजनल पेटेंट के लिए भी आवेदन कर दिया है।
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ऋषिकेश में 28-31 अक्तूबर तक चले राज्य विज्ञान महोत्सव-2013 में वैज्ञानिक एवं गणितीय प्रवर्तन संसाधन में प्रथम स्थान पाने से उत्साहित बाल वैज्ञानिक अनुजा डुकलान को जब बायोएशिया ने यंग माइंड अवार्ड लिए चुना तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
20 देशों के वैज्ञानिकों के सामने दिया प्रजेंटेशन
उसके हर काम में बढ़-चढ़कर सहयोग करने वाले नंदपुर निवासी उसके किसान पिता सुरेंद्र डुकलान उसे लेकर हैदराबाद पहुंचे।
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18, 19 और 20 फरवरी को अनुजा ने एशिया के 20 देशों से पहुंचे वैज्ञानिकों के समक्ष इंटरनेशनल कंवेंशन सेंटर में अपने आविष्कार का प्रजेंटेशन दिया।
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वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद हैदराबाद की आईआईसीटी लैब में उसका एंटी बैक्टियल टेस्ट सफल रहा। इसके बाद उसे एशिया के प्रथम पुरस्कार बायोएशिया यंग माइंड अवार्ड-2014 के लिए चुन लिया गया।
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अनुजा को यह अवॉर्ड जर्मनी के नोबेल प्राइज विजेता (मेडिसिन) डॉ. हेराल्ड जूर हाउसैन ने दिया। जिसके तहत उसे 30 हजार रुपए और प्रशस्ति पत्र दिया गया।
माता-पिता की अकेली संतान है अनुजा
घमंडपुर निवासी अनुजा अपने माता-पिता की अकेली संतान हैं। दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी की नौकरी छोड़ यहां नंदपुर गांव में खेती किसानी करने वाले सुरेंद्र डुकलान ने बेटी की लगन और रुचि को देखते हुए कंधे से कंधा मिलाकर उसका हौसला बढ़ा रहे हैं।
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विज्ञान के क्षेत्र में अभिरुचि को देखते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग नई दिल्ली की ओर से भी अनुजा को पांच हजार रुपए का प्रोत्साहन पुरस्कार मार्च 2013 में मिल चुका है।
क्या है बायोएशिया
यह 20 एशियाई देशों का सबसे बड़ा प्रौद्योगिकी और जैव व्यापार मंच है। जिसका मुख्यालय हैदराबाद है। वर्ष 2004 में यह शुरू हुआ था।
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यह संस्था बायोटेक और बायोफार्मा कंपनियों, अनुसंधान संस्थान, शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों, लीक से हटकर खोजों और जैव प्रौद्योगिकी में प्रभावी समाधान को प्रोत्साहित करता है।
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चीन, भारत, बांग्लादेश, मलेशिया, फिलीपींस, रूस, कजाकिस्तान, पाकिस्तान, इजराइल, ईरान और इंडोनेशिया समेत कई प्रमुख एशियाई देश इसके सदस्य हैं।
क्या है यूफोरबिया रॉयलीना
यूफोरबिया रॉयलीना कैक्टस प्रजाति का एक सदाबहार झाड़ीनुमा कांटेदार पौधा है। जिसे स्थानीय भाषा में सेहुर, सुराई, सूला और चुरी नामों से जाना जाता है। यह विश्व के कई भागों में उगता है।
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ज्यादातर पथरीली और मरुस्थलीय भूमि में पाया जाता है। भारत में मध्य हिमालय की घाटियों, राजस्थान और गुजरात में यह प्रचुर मात्रा में उगता है।
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यह एक सजावटी पौधा भी है जिसे गमलों, आंगन और पार्क में भी लगाया जाता है। इससे दूध जैसा सफेद द्रव निकलता है, जो किसी काम नहीं आता।
क्या है एंटी बैक्टीरिया टर्पिनॉयड
बाल वैज्ञानिक अनुजा ने बताया कि अमूमन यह पौधा किसी काम का नहीं होता। ऐसे में उनके दिमाग में इसके द्रव का उपयोग करने की बात सूझी और कई तरह के प्रयोग करने शुरू कर दिए। आखिरकार एक दिन उसे सफलता मिल गई।
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भजंक आसवन विधि द्वारा इसके लैटेक्स (द्रव) से बैक्टीरिया प्रतिरोधी टर्पिनॉयड बनाने में कामयाब रही। इस टर्पिनॉयड का उपयोग औषधि और कीटनाशक के रुप में किया जा सकता है।