उत्तराखंड में प्रस्तावित नई विद्युत दरों पर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में उपभोक्ताओं ने कड़ा विरोध जताया।
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सुनवाई में कम ही लोग आए, लेकिन जो आए उन्होंने साफ किया कि ऊर्जा निगम को आम आदमी पर बोझ डालने के बजाय बिजली चोरी और लाइन लॉस कम करने की दिशा में पहल करनी चाहिए। आयोग मार्च में नई दरों की घोषणा करेगा।
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सोमवार को चकराता रोड स्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सभागार में प्रथम चरण में उद्योग व वाणिज्य श्रेणी के उपभोक्ताओं की सुनवाई हुई। उद्योगपतियों की तरफ से प्रांतीय इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने आयोग के समक्ष बात रखी।
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आम उपभोक्ताओं को कोई सहूलियत नहीं
पदाधिकारियों ने कहा कि ऊर्जा निगम लघु उद्योगों की अघोषित विद्युत कटौती बंद कर दे और वितरण में लाइन लॉस, बिजली चोरी रोके तो प्रस्तावित 309.9 करोड़ के घाटा कम किया जा सकता है।
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इसके बाद टैरिफ रिवाइज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दोपहर तीन बजे से आम उपभोक्ताओं की सुनवाई हुई। उपभोक्ताओं ने कहा कि हर वर्ष बिजली की दरों में वृद्धि की जा रही है, लेकिन आम उपभोक्ताओं को कोई सहूलियत नहीं दी जा रही है।
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जन सुनवाई में नियामक आयोग के अध्यक्ष जगमोहन लाल, सीएस शर्मा सदस्य तकनीकी, केपी सिंह सदस्य, ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक एसएस यादव, आयोग के सहायक निदेशक प्रशासन दीपक कुमार एवं जलविद्युत निगम के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
वर्तमान में प्रस्तावित विद्युत श्रेणी
बिना मीटर प्रति कनेक्शन ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मीटर आपूर्ति के उपभोक्ताओं के लिए वर्तमान - प्रस्तावित पर्वतीय क्षेत्र - 1.40 रुपए प्रति यूनिट - नहीं बढ़ी अन्य क्षेत्र - 3.10 - 6.10 रुपए प्रति यूनिट बीपीएल - 1.50 - 1.50 रुपए प्रति यूनिट
अन्य घरेलु उपभोक्ता - 4 किलोवाट तक वर्तमान - प्रस्तावित 100 यूनिट तक 2.30 - 2.35 रुपए प्रति यूनिट 110 से 200 2.70 - 2.80 रुपए प्रति यूनिट 210 से 400 3.35 - 3.60 रुपए प्रति यूनिट
400 किलोवाट से अधिक यूनिट चार्ज - 3.50 - 3.90
औद्योगिक क्षेत्र प्रति यूनिट 3.05 - 3.70 लोड फैक्टर 33 प्रतिशत तक 3.30 - 4.00 लोड फैक्टर 33 प्रतिशत से अधिक 3.60 - 4.30 लोड फैक्टर 50 प्रतिशत से अधिक
कमरा एक, खिड़की दो, ट्यूबलाइट आठ
जनसुनवाई में आम उपभोक्ताओं ने टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव के विरोध के साथ ऊर्जा निगम अफसरों की पोल भी खोली। निगम के रिटायर्ड अफसरों को निशुल्क कनेक्शन पर भी सवाल उठाया गया।
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मयूर विहार निवासी योगेंद्र सिंह राठी ने कहा कि ऊर्जा निगम मुख्यालय के अधिकारियों के कमरों में आठ-आठ ट्यूब लाइटें दिनभर जलती रहती हैं। कमरे में दो खिड़कियां हैं, जिनसे पर्याप्त रोशनी आती है। लेकिन अफसर हैं तो वे मनमानी बिजली खर्च करते हैं।
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यह भी सवाल उठाया कि निगम के रिटायर्ड कर्मचारी-अधिकारी निशुल्क कनेक्शनों का बेजा फायदा उठा रहे हैं। आरोप लगाया कि घर में कई किरायेदारों को रखकर ये लोग निशुल्क बिजली का भी बिल उनसे लेते हैं।
योगेंद्र राठी ने कहा कि विभिन्न विभागों पर बिजली बिल का लाखों का बकाया है, लेकिन ऊर्जा निगम इसकी वसूली पर सुस्त बना रहता है।
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बताया कि विकासनगर तहसील पर लाखों, पुलिस विभाग में करोड़ों का बकाया है। अगर निगम बकाया ही वसूल ले तो टैरिफ बढ़ाने की जरूरत नहीं होगी।
सुनवाई में सिर्फ 27 उपभोक्ता नियामक आयोग की सुनवाई, वह भी राजधानी में लेकिन उपभोक्ता पहुंचे महज 27। सूत्रों के अनुसार, पिछली सुनवाई के बाद उपभोक्ताओं में यह संदेश गया कि आयोग उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेता। यही वजह रही कि इस बार कम ही लोग सुनवाई में आए।