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अंकिता हत्याकांड: मुख्य आरोपी पुलकित का केस ट्रांसफर प्रार्थनापत्र कोर्ट ने किया खारिज, वजह को बताया निराधार

Fri, 01 Mar 2024 07:22 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी

सार

Ankita Murder Case: पुलकित आर्य ने अदालत में निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं होने की बात कहते हुए जिला कारागार चमोली के माध्यम से केस ट्रांसफर के लिए प्रार्थनापत्र दिया था।
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पुलकित आर्य को ले जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंकिता हत्याकांड के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य के केस ट्रांसफर का प्रार्थनापत्र खारिज हो गया है। सत्र न्यायाधीश पौड़ी की अदालत ने केस ट्रांसफर के लिए आरोपी द्वारा अदालत में रखे गए सारे आधार को निराधार बताया। अदालत ने कहा मामले की सुनवाई एडीजे कोटद्वार की अदालत में कानून व न्याय प्रणाली के अनुरूप चल रही है।

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मुख्य आरोपी ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोटद्वार की अदालत में निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं होने की बात कहते हुए जिला कारागार चमोली के माध्यम से केस ट्रांसफर के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोटद्वार की अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए सत्र न्यायाधीश पौड़ी की अदालत को भेज दिया था। मामले की पहली सुनवाई 16 फरवरी और दूसरी सुनवाई 26 फरवरी को हुई। दूसरी सुनवाई में पुलकित आर्य ने अदालत में अपना पक्ष रखा था।

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अभियोजन पक्ष से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रदीप कुमार भट्ट ने प्रार्थनापत्र में दिए गए केस ट्रांसफर के तथ्य आधारहीन बताए। भट्ट ने बताया कि सत्र न्यायाधीश पौड़ी अजय चौधरी की अदालत ने अंकिता हत्याकांड के मुख्य आरोपी द्वारा केस ट्रांसफर के लिए अदालत में रखे आधारों को निराधार बताते हुए प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है।

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पुलकित ने केस ट्रांसफर के लिए दिए थे ये आधार

  • पुलिस ने एक महिला को खुशराज बता पहचान छिपाकर गवाही कराई गई थी। अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता को बोलने तक का मौका नहीं दिया गया था।
  • अंकिता के पिता न्यायालय परिसर में गवाही के लिए आते-जाते समय अभद्र टिप्पणी करते हैं।
  • अदालत में धारा-302 से संबंधित कई मुकदमे लंबित हैं, लेकिन उनके केस में जल्दी-जल्दी तारीख लगा दी जा रही है।
  • पुलिस व प्रशासन की मौजूदगी में जानलेवा हमला किए जाने, रिजॉर्ट तोड़े जाने, मुकदमे से अधिवक्ता हटाए जाने व फैक्ट्री में आग लगाए जाने की बात भी कही।
  • मृतका का कमरा तोड़कर साक्ष्यों को नष्ट करने का काम किया गया। शासन-प्रशासन की इस कार्रवाई में किसी को आरोपी नहीं बनाया गया। यह एक पक्षीय कार्रवाई थी।
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