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हेलीकॉप्टर के डर से 'घर' छोड़ने को मजबूर केदारघाटी के वन्यजीव

Sat, 01 Aug 2015 03:53 PM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
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केदारनाथ धाम के लिए संचालित हेलीकॉप्टरों की उड़ानों के शोर से केदारघाटी का इको सिस्टम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। नतीजा, शेड्यूल एक के विलुप्तप्राय थार और कस्तूरा मृग समेत अन्य कई वन्यजीव अपना पुश्तैनी घर (केदारनाथ वन्यजीव विहार) छोड़कर भाग रहे हैं।
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दुर्लभ हिमालयन गिद्धों की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है और तितलियों के वतन छोड़ने से कई वनस्पतियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। ये तथ्य उपवन संरक्षक केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर की रिपोर्ट का ऐसा सनसनीखेज सच है जिन्हें वन विभाग की फाइलों में उन्हीं जिम्मेदार अधिकारियों ने दफन कर दिया गया जिन पर जंगल और वन्यजीवों के सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

यह रिपोर्ट दो साल पुरानी है, इसको लेकर जिम्मेदार अधिकारी कह सकते हैं कि इतनी पुरानी रिपोर्ट के हवाले से अब सवाल उठाने से क्या फायदा ? जवाब यही देते चलें, हेलीकॉप्टर अब भी चल रहे हैं। इनके परिचालन से आ रही समस्याओं के निराकरण के लिए आखिर किया ही क्या गया?
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आरटीआई के तहत प्राप्त इस रिपोर्ट के तथ्यों को लेकर अमर उजाला रिपोर्टर ने शुक्रवार को वन विभाग के हर जिम्मेदार से बात की, ऑफ द रिकॉर्ड वे कुछ बोले भी, मगर ऑन द रिकॉर्ड सब गोलमोल। इस मुद्दे को उठाने के पीछे अमर उजाला का आशय यह नहीं है कि हेलीकॉप्टर की उड़ाने बंद कर दी जाएं।

हमारा इरादा यह अगर एक जिम्मेदार अधिकारी ने यह तथ्य संज्ञान में लाए हैं तो उसका विधिवत अध्ययन करवाकर ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे न तो पर्यटन प्रभावित हो न ही केदारघाटी को इको सिस्टम तबाह हो।

कैसे वन्य जीवों को विस्थापित कर रहे हेलीकॉप्टर, पढ़ें रिपोर्ट

प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) उत्तराखंड को यह रिपोर्ट 22 मई 2013 को भेजी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक केदारघाटी में संचालित हेलीकॉप्टर सेवा की सभी उड़ानें केदारनाथ वन्य जीव विहार के ऊखीमठ रेंज के मल्ला कालीफाट ब्लॉक के ऊपर से मंदाकिनी घाटी से गुजरती हैं।

हेलीकॉप्टर कितनी ऊंचाई से जाएंगे यह मानक तय नहीं है। कई स्थानों पर हेलीकॉप्टर सेंचुरी से सिर्फ 100 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरते देखे जाते हैं। वन क्षेत्र में गश्ती दलों ने पाया कि हेलीकॉप्टर के परिचालन के बाद से इस इलाके में प्राय: दिखने वाले घुरल, काकड़, भालू आदि अन्य वन्यजीव नहीं दिखाई दे रहे हैं।

दुर्लभ थार और कस्तूरा मृग (शेड्यूल एक) भी इन स्थानों को छोड़कर अन्यत्र कहीं चले गए। पक्षी, छोटी तितलियां घर छोड़कर भाग रहे हैं। तितलियों के चले जाने से थुनेर प्रजाति की वनस्पतियों के पॉलीनेशन पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। यही तितलियां परागकण इधर से उधर पहुंचाती हैं। कई वनस्पतियां के बीज पक्षियों के माध्यम से फैलते हैं। वन उप संरक्षक की रिपोर्ट में वनस्पतियों और वन्यजीवों दोनों के कुप्रभावित होने की भी बात कही गई थी।
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रिपोर्ट भेज दी, आगे शासन जाने

आकाश कुमार वर्मा, उप वन संरक्षक केदारनाथ वन्य प्रभाग से दो टूक
सवाल- हेलीकॉप्टरों के संचालन से केदारघाटी वन्यजीव विहार के इको सिस्टम के प्रभावित होने को लेकर आपने एक रिपोर्ट शासन को भेजी थी, क्या नतीजा निकला?

जवाब- हां, रिपोर्ट भेजी थी, मगर आगे क्या हुआ कुछ पता नहीं।

सवाल- ऐसा क्यों कह रहे हैं, जब आप मानते हैं कि इस क्षेत्र का इको सिस्टम प्रभावित हो रहा है तो आपकी भी जिम्मेदारी तो बनती है?

जवाब- मेरा काम रिपोर्ट भेजना था, मैनें रिपोर्ट भेज दी। जो कुछ करना है शासन को ही करना है। (अच्छा, मीटिंग में हूं। टेलीफोन काट दिया गया)

प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक दिग्विजय सिंह खाती से दो टूक
सवाल- हेलीकॉप्टरों की उड़ानों से केदार वन्यजीव विहार में इको सिस्टम प्रभावित होने संबंधी उप वन संरक्षक गोपेश्वर की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई आप बता सकते हैं?

जवाब- मैं अभी आया हूं। मैने तो ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं देखी। पता करूंगा।

सवाल- रिपोर्ट विभाग में है, आरटीआई में ली गई इसकी एक कॉपी मेरे पास है, आप देख लीजिए?

जवाब- पहले मैं वन्य जीव संस्थान को लिखूंगा कि केदारघाटी का विस्तृत अध्ययन करे। उसकेबाद देखेंगे क्या किया जा सकता है? ( रिपोर्ट पढ़ने के बाद)

बोले मंत्री
इस तरह की कोई रिपोर्ट मेरे संज्ञान में नहीं लाई गई। पता कराएंगे कि हवाई उड़ानों से कौन-सा भाग प्रभावित हो रहा है। उसी के लिहाज से व्यवस्था बनाई जाएगी।
-दिनेश अग्रवाल, वन मंत्री उत्तराखंड
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