दक्षिण काली मंदिर तंत्र पीठ पर पीठाधीश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज के आचार्यत्व में बृहस्पतिवार की आधी रात को ही मंदिर के गर्भगृह में पशुबलि दे दी गई।
हालांकि पशुबलि सप्तम कालरात्रि की रात में दी जाती रही है। इस बार बृहस्पतिवार की रात सप्तमी तिथि आ जाने पर बलि देने का आयोजन संपन्न कर लिया गया।
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सप्तम कालरात्रि में ही पूजा
प्रतिवर्ष सप्तम काल रात्रि को मां की पूजा की रात्रि, महारात्रि के रूप में मनाई जाती है। जहां-जहां काली, बगुलामुखी आदि दसमहाविद्याओं की पीठें हैं, वहां सप्तम कालरात्रि में ही पूजा होती हैं।
श्रद्धालुओं ने भी बलिप्रथा का दर्शन किया
दक्षिण काली पीठ पर भी सप्तमी तिथि को पूजा होती रही है। इस बार सप्तमी तिथि बृहस्पतिवार की रात 7.38 बजे लग गई और उस रात्रि में 12 बजे के बाद बलि देने की प्रथा संपन्न कर ली गई। रात में अनेक नगरवासियों के साथ बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने भी बलिप्रथा का दर्शन किया।
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शुक्रवार की रात व्यक्तिगत बलियां चंडीघाट पर दी जाएंगी। बलि प्रथा का समर्थन किसी भी क्षेत्र से नहीं किया गया, अलबत्ता विरोध भी किसी ने नहीं किया।
हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत
समाजसेवी महामाया ग्रुप जमना पैलेस के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने अवश्य एक ज्ञापन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिया। ज्ञापन की प्रतिलिपियां मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और विधायक मदन कौशिक को भी दी गई हैं।
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मनीष गुप्ता ने कहा है कि हरकी पैड़ी क्षेत्र से पांच किमी की परिधि में किसी भी प्रकार का मांस, मदिरा और पशुबलि निषिद्ध है। इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करते हुए दक्षिण काली मंदिर की बलि प्रथा पर रोक लगानी चाहिए।