ऐसे में सोमवार को कांग्रेस पदाधिकारी इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी बातचीत करेगी। यह भी साफ है कि विधेयक के पारित होने के बाद भी सदन पर इसका प्रभाव 2022 के विधानसभा के चुनाव के बाद ही दिखाई देखा। हालांकि एंग्लो इंडियन का प्रतिनिधित्व 25 जनवरी 2020 को समाप्त हो जाएगा, लेकिन वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल तक मनोनीत सदस्य की सदस्यता बरकरार रहेगी।
संविधान के 126वें संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा से पारित किया जा चुका है। अब 50 प्रतिशत राज्यों को इस संशोधन विधेयक को अनुमति देनी है। उत्तरप्रदेश इस संशोधन विधेयक को पारित कर चुका है। इसी विधेयक के लिए यह एक दिन का विशेष सदन आहूत किया जा रहा है। विधेयक में स्पष्ट है कि एससी/एसटी का प्रतिनिधित्व 2030 तक बढ़ाना है, लेकिन एंग्लो इंडियन समुदाय से विधानसभा में आरक्षण के लिए ऐसा नहीं है।
- जगदीश चंद्र, सचिव विधानसभा
यह सदन में तय किया जाएगा कि क्या कहना है और क्या नहीं। केंद्र सरकार ने कोई फैसला किया है तो कुछ सोच समझकर ही किया होगा। जनसंख्या फार्म में एंग्लो इंडियन की गणना के लिए कोई प्रावधान ही नहीं था। प्रदेश में ही एंग्लो इंडियन की संख्या ढाई लाख से अधिक होगी।
- जार्ज आईवन ग्रेगरी मैन, विधान सभा में एंग्लो इंडियन प्रतिनिधि
अभी इस पर पार्टी स्तर पर बात की जाएगी और अन्य वरिष्ठ कांग्रेसियों से भी पूछा जाएगा। इसके बाद ही कोई रणनीति तय की जाएगी।
- इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष