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...तो साल 2022 के बाद उत्तराखंड विधानसभा में नहीं होगा एंग्लो इंडियन सदस्य

Mon, 06 Jan 2020 08:07 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • संविधान के 126वें संशोधन विधेयक से प्रदेश में भी 71वें विधायक की कुर्सी पर संकट
  • मंगलवार को विशेष सत्र में लाया जा रहा है संशोधन विधेयक
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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2022 के चुनाव के बाद उत्तराखंड में गठित होने वाली विधानसभा में भी एक सदस्य कम हो जाना करीब-करीब तय है। मंगलवार को एक दिन के विशेष सत्र में प्रदेश सरकार संविधान के अनुच्छेद 334 के तहत 126वें संशोधन विधेयक को सदन के पटल पर रखेगी।

 

इस संशोधन विधेयक  में लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में अनुसूचित जाति, जनजाति के प्रतिनिधित्व में आरक्षण को 10 साल के लिए बढ़ाया जा रहा है, लेकिन एंग्लो इंडियन प्रतिनिधित्व को नहीं। प्रदेश में एंग्लो इंडियन समुदाय से एक प्रतिनिधि को नामित करने की परंपरा रही है।

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प्रदेश में एंग्लो इंडियन समुदाय की खासी संख्या है और यही वजह रही कि पहली विधानसभा से लेकर अभी तक इस समुदाय से विधानसभा के लिए सदस्य नामित किया जाता रहा है। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 2022 तक है।

 

संविधान के 126वें संशोधन विधेयक को सात जनवरी को आयोजित विशेष सत्र में सत्ता पक्ष पारित कराने का पूरा मन भी बना चुका है। सदन में बहुमत भी भाजपा का है और कांग्रेस इस मामले को लेकर अभी रुख तय नहीं कर पाई है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व इस मामले को लेकर दिल्ली के संकेत के इंतजार में भी है।

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ऐसे में सोमवार को कांग्रेस पदाधिकारी इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी बातचीत करेगी। यह भी साफ है कि विधेयक के पारित होने के बाद भी सदन पर इसका प्रभाव 2022 के विधानसभा के चुनाव के बाद ही दिखाई देखा। हालांकि एंग्लो इंडियन का प्रतिनिधित्व 25 जनवरी 2020 को समाप्त हो जाएगा, लेकिन वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल तक मनोनीत सदस्य की सदस्यता बरकरार रहेगी।

संविधान के 126वें संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा से पारित किया जा चुका है। अब 50 प्रतिशत राज्यों को इस संशोधन विधेयक को अनुमति देनी है। उत्तरप्रदेश इस संशोधन विधेयक को पारित कर चुका है। इसी विधेयक के लिए यह एक दिन का विशेष सदन आहूत किया जा रहा है। विधेयक में स्पष्ट है कि एससी/एसटी का प्रतिनिधित्व 2030 तक बढ़ाना है, लेकिन एंग्लो इंडियन समुदाय से विधानसभा में आरक्षण के लिए ऐसा नहीं है।
- जगदीश चंद्र, सचिव विधानसभा

यह सदन में तय किया जाएगा कि क्या कहना है और क्या नहीं। केंद्र सरकार ने कोई फैसला किया है तो कुछ सोच समझकर ही किया होगा। जनसंख्या फार्म में एंग्लो इंडियन की गणना के लिए कोई प्रावधान ही नहीं था। प्रदेश में ही एंग्लो इंडियन की संख्या ढाई लाख से अधिक होगी।
- जार्ज आईवन ग्रेगरी मैन, विधान सभा में एंग्लो इंडियन प्रतिनिधि

अभी इस पर पार्टी स्तर पर बात की जाएगी और अन्य वरिष्ठ कांग्रेसियों से भी पूछा जाएगा। इसके बाद ही कोई रणनीति तय की जाएगी।
 - इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष 
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