सदियों पुरानी ऐतिहासिक धरोहर आदिबदरी मंदिर परिसर की संरचना पर खतरे के संकेत दिखाई देने लगे हैं। परिसर में उभर रही दरारें और कई स्थानों पर धंसते पत्थरों ने मंदिर के संरक्षण और सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
आदिबदरी मंदिर परिसर में दरारें आ रही हैं। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार दरारों का बढ़ना मंदिर परिसर के लिए खतरा बन सकता है। यह दरारें हाईवे के समानांतर परिसर में हैं। कई जगह परिसर के पत्थर के भी धंस रहे हैं। आठवीं-नौवीं शताब्दी के मध्य निर्मित यह मंदिर समूह गढ़वाल के सबसे बड़े मंदिर समूहों में से एक है।
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मूर्तिकला और स्थापत्यकला के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर परिसर में करीब 25 फीट तक हल्की पतली दरार आई है। कई जगह किनारों पर परिसर के पत्थर भी धंस गए हैं। मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष विजयेश नवानी ने बताया कि भारी वाहनों के गुजरने से मंदिर में कंपन होता है। चमोली की पूर्व जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने इस खतरे का संज्ञान लेकर बड़े वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने की अनुशंसा भी की थी लेकिन कोई प्रगति नहीं हुई।
आदिबदरी धाम मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष जगदीश बहुगुणा ने मंदिर की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए पुरातत्व विभाग से इस मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह किया है। पुरातत्व विभाग के सीए (कंजर्वेशन असिस्टेंट) प्रमोद सेमवाल ने बताया कि महानिदेशक पुरातत्व विभाग ने हाल ही में निरीक्षण के बाद सुरक्षा के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें मंदिर के धंसे आंगन को ठीक करने और राजमार्ग को अन्यत्र स्थानांतरित करने का उल्लेख है।