कल तक आधुनिक मानव के पुरातन पुरखे जिन्हें होमोसैपियंस कहा जाता है के पूर्वज जावामैन समझे जाते थे, लेकिन विंध्याचल और सतपुड़ा के बीच गुफाओं में एक तीन लाख पुराने जीवाश्म ने फिर एक नया तथ्य सामने रख दिया है।
इससे स्पष्ट हो गया है कि होमोसैपियंस के पुरखे जावामैन नहीं हिंडलबर्ग गैंसिस थे। जीवाश्म की जांचों में पाया गया कि होमोसैपियंस और हिंडलबर्ग गैंसिस का मस्तिष्क 1400 सीसी का था, जबकि जावामैन का मस्तिष्क सिर्फ 1000 सीसी का ही रहा है।
विंध्याचल-सतपुड़ा के बीच नर्मदा घाटी में अति प्राचीन गुफाएं हैं। प्राचीनतम मानव जीवाश्म भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण की टीम को यहीं से मिले हैं। जीवाश्म की जांच हुई तो पता चला कि हिंडलबर्ग गैंसिस के बहुत सारे लक्षण होमोसैपियंस से मिलते हैं।
विज्ञानियों को नर्मदा घाटी की अति प्राचीन गुफाओं में हजारों के हिसाब से गैंसिस की चित्रकारियां भी मिली हैं। इसके साथ ही बहुत से पत्थरों के टेढ़े-मेढ़े औजार भी मिले हैं। विज्ञानियों का मत है कि इसी घाटी में मानव की उत्पत्ति हुई होगी। यहां का मौसम अच्छा है। इससे पुरातन मानव ने यहां रहना पसंद किया।