फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

5600 किमी तक बिना रुके उड़ता रहा यह बाज

Sat, 04 Jan 2014 01:14 PM IST
प्रेम प्रताप सिंह/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
पांच दिनों में पहाड़, नदी, मैदान, मुल्क, समंदर पार करते हुए नॉन स्टाप 5600 किलोमीटर की परवाज, है न हैरानी वाली बात। यह कर दिखाया है लगभग 170 ग्राम वजन वाले परिंदे अमूर फाल्कन (बाज प्रजाति) ने।
विज्ञापन


नर प्रजाति के इस पक्षी ने सात नवंबर, 2013 को नागालैंड से उड़ान भरी थी और 12 नवंबर को सोमालिया पहुंच गया। इस तरह से देखें इस पक्षी ने 120 घंटे में 5600 की दूरी तय की, अर्थात प्रति घंटे लगभग 47 किमी।

भारतीय वन्यजीव संस्थान ने पहली बार तीन अमूर फाल्कन (एक नर और दो मादा) पर सैटेलाइट टैग लगाकर नागालैंड से सोमालिया तक उनकी उड़ान का रिकार्ड हासिल किया है। संस्थान के वैज्ञानिक आर सुरेश इन पक्षियों की मॉनीटरिंग कर रहे हैं।
विज्ञापन


अगले एक साल तक इनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। अब तक देश में केवल बाघों और हाथियों पर ही रेडियो कॉलर टैग लगाकर उनके मूवमेंट पर नजर रखी जाती थी। पक्षियों पर यह पहला प्रयोग है।

2012 में 12 हजार पक्षी मारे गए थे नागालैंड में
अमूर फाल्कन मूलत: रूस के साइबेरिया क्षेत्र अमूर का बाशिंदा है। नवंबर में बर्फबारी से ठीक पहले अनुकूल मौसम और भोजन की तलाश में यह अमूर से पलायन कर चीन, भारत होते हुए अफ्रीका निकल जाते हैं। वहां इस वक्त गर्म मौसम रहता है।

हर साल इन पक्षियों के भारत के नगालैंड पहुंचते ही इनका शिकार शुरू हो जाता था। वर्ष 2012 में 12 हजार से अधिक पक्षी मार दिए गए तो सवाल उठने लगे।

इसके बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस पक्षी पर अध्ययन की जिम्मेदारी भारतीय वन्यजीव संस्थान को सौंपी है। इसमें नागालैंड वन विभाग सहित अन्य कई संस्थाएं मदद कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर इस साल इसे बचाने की भी मुहिम चलाई गई है।

तीन दिन में पार किया अरब सागर
संस्थान ने तीनों फाल्कन पर सात नवंबर को पांच ग्राम का सैटेलाइट चिप लगाया था। नर फाल्कन ने पांच दिन तक बिना रुके नगालैंड से अफ्रीकी देश सोमालिया तक की उड़ान पूरी की। बीच में अरब सागर को पार करने में नर फाल्कन को तीन दिन का वक्त लगा। चूंकि सोमालिया हिंद महासागर के बाद पड़ने वाला सबसे पहला देश है।

इसलिए इसकी पहली मंजिली सोमालिया ही होती है। अब यह नर फाल्कन सोमालिया से भी आगे के अफ्रीकी देशों में घूम रहा है। दूसरी ओर, नगालैंड से उड़ान के बाद एक मादा ने आंध्र प्रदेश जबकि दूसरी ने महाराष्ट्र में रात बिताई थी।

दोनों मादाएं सात दिन बाद सोमालिया पहुंचीं। खास बात यह रही कि तीनों पक्षियों ने अलग-अलग मार्गों से अपनी उड़ान पूरी की, लेकिन पहुंचे एक ही स्थान पर।

एक माह में आधी दुनिया का चक्कर
यह पक्षी एक माह में लगभग 22000 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हैं। अमूर फाल्कन कार्बेट टाइगर रिजर्व में काफी पहले देखा गया था। अक्तूबर 2012 में राजाजी राष्ट्रीय पार्क में भी इसे देखा गया।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें