जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) से भले ही कैंट क्षेत्र में रहने वाले लोगों को निराशा मिली हो, लेकिन अमृत योजना शहरी विकास में पिछड़ रही छावनियों के लिए संजीवनी बनेगी।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने अमृत की गाइड लाइन में सीवर, पेयजल, ड्रेनेज सहित फुटपाथ के कार्य नगर निगम के साथ छावनी परिषदों में भी करवाने का प्रावधान रखा है। प्रदेश की तीन छावनियों क्लेमेंटटाउन, गढ़ी और रुड़की को इस योजना का लाभ मिलेगा।
अब तक छावनी परिषदों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यही थी कि उनके प्रोजेक्ट को राज्य सरकार अलग करके चलती थी। कैंट में पेयजल और सीवर की व्यवस्था के लिए भी राज्य सरकार हाथ खड़े कर चुकी थी, लेकिन अब केंद्र से ही इन क्षेत्रों के लिए उम्मीद जग गई है।
शहरभर में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत हो रहे कार्य केंद्र में सरकार बदलते ही अमृत नाम से होने लगे। इसके तहत नए प्रावधान तय किये गए और नई गाइडलाइन बनी। अमृत के तहत सिर्फ नगर क्षेत्र को ही नहीं बल्कि छावनी परिषदों को भी शामिल कर लिया गया।
अब विभाग भी अमृत की गाइड लाइन को फॉलो कर रहे हैं। अमृत योजना के तहत इस समय प्रदेश के छह शहरों देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, हल्द्वानी, काशीपुर और रुद्रपुर में विकास कार्य चल रहे हैं।
दून और रुड़की में कैंट क्षेत्र है, जिसे अमृत योजना के तहत फायदा पहुंचने वाला है। पेयजल निगम केंद्र से अमृत के तहत होने वाली फंडिंग में छावनियों को शामिल कर रहा है। इस संबंध में छावनी परिषदों के प्रतिनिधियों से प्रारंभिक दौर की वार्ता चल रही है।
ऐसी हुई शुरूआत
प्रेमनगर के विंग नंबर-6 में दो करोड़ के पेयजल प्रोजेक्ट पेयजल निगम ने अमृत के तहत ले लिए हैं। पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता सुजीत कुमार विकास ने बताया कि लंबे समय से इस क्षेत्र में पानी की किल्लत है। यहां दो करोड़ रुपये से नलकूप, ओवर हैड टैंक और पाइप लाइन बिछाने का काम किया जाएगा। बताया कि गढ़ी कैंट से भी सात करोड़ के पेयजल प्रस्ताव दिए गए हैं। उन्हें आगे की योजनाओं में शामिल किए जाएगा।
यदि अमृत की गाइड लाइन में ऐसा दिया गया है तो नगरीय क्षेत्रों के साथ ही छावनी परिषदों में भी काम किया जाएगा। प्रदेश के जिन छह शहरों में अमृत के तहत काम हो रहा है, उनमें फिलहाल दून और रुड़की में ही छावनी परिषद हैं, उनको भी यह फायदा दिया जाएगा।
- भजन सिंह, एमडी, पेयजल निगम