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उत्तराखंडः परिवर्तन यात्रा में जान फूंकने की चुनौती का सामना करेंगे शाह

Tue, 22 Nov 2016 09:58 AM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी
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amit shah - फोटो : ANI
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प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की राह देख रहे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। 
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2006 से उलट परिवर्तन यात्रा में इस बार भाजपा के कई वरिष्ठ नेता घरों में ही बैठे हैं। शाह अभी तक भाजपा को प्रदेश में चेहरा भी नहीं दे पाए हैं। ऐसे में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता खिंचे-खिंचे भी नजर आ रहे हैं। मंगलवार को अल्मोड़ा जनसभा में शायद शाह को इनमें से कुछ सवालों के जवाब भी मिले।

शाह ही थे, जिन्होंने देहरादून से भाजपा की परिवर्तन यात्रा का आगाज किया था। इससे पहले हरिद्वार में हुई रैली में कम भीड़ जुटने से भी शाह नाराज भी हुए थे। कुछ सवाल भी पार्टी नेताओं के सामने शाह ने उठाए थे और कुछ चुनौतियों से भी दो-चार हुए थे। अब यही चुनौतियां शाह के सामने और सघन होकर उभरी हैं।
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शाह के सामने पहली चुनौती पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय करने की है। 2006 की रथ यात्रा की कमान पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के हाथों में थी। वरिष्ठ नेता बची सिंह रावत को विजन डाक्यूमेंट में व्यस्त दिख रहे हैं।
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अजय टम्टा - फोटो : PTI
नरेश बंसल और कैलाश पंत पार्टी पदाधिकारी रहते हुए सक्रिय थे, लेकिन इस बार गायब हैं। कोश्यारी खिंचे-खिंचे हैं और मनोहर कांत ध्यानी, पूरन चंद्र शर्मा भी बाहर निकल कर नहीं आए हैं। ऐेसे में शाह को कुमाऊं में प्रवेश करते ही इस खासी बड़ी चुनौती का सामना करना होगा।

पिछली दो रैलियों में कम भीड़ का स्वाद चख चुके शाह को अल्मोड़ा में परिवर्तन यात्रा में जान फूंकने की चुनौती का सामना भी करना होगा। परिवर्तन यात्रा के संयोजक बलराज पासी के साथ संगठन महामंत्री संजय कुमार के हाथ में यात्रा की कमान है।

2006 में ही तीन-तीन संगठन मंत्री यात्रा से जुड़े हुए थे। अंदरखाने कई भाजपा नेता यात्रा में सक्रिय भूमिका न मिलने से नाराज भी हैं। हाल यह था कि ऊधमसिंह नगर में अधिकतर स्थानों पर परिवर्तन यात्रा की कमान अकेले केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा को संभालनी पड़ी।

प्रदेश में भाजपा के सामने एक संकट चेहरे का भी है। धड़ेबंदी और शक्ति प्रदर्शन को देखते हुए अभी तक भाजपा चेहरा सामने लाने से बचती रही है। इसका असर यह भी है कि कोश्यारी 2019 के बाद समाजसेवा की बात कर रहे हैं।
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