प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की राह देख रहे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
2006 से उलट परिवर्तन यात्रा में इस बार भाजपा के कई वरिष्ठ नेता घरों में ही बैठे हैं। शाह अभी तक भाजपा को प्रदेश में चेहरा भी नहीं दे पाए हैं। ऐसे में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता खिंचे-खिंचे भी नजर आ रहे हैं। मंगलवार को अल्मोड़ा जनसभा में शायद शाह को इनमें से कुछ सवालों के जवाब भी मिले।
शाह ही थे, जिन्होंने देहरादून से भाजपा की परिवर्तन यात्रा का आगाज किया था। इससे पहले हरिद्वार में हुई रैली में कम भीड़ जुटने से भी शाह नाराज भी हुए थे। कुछ सवाल भी पार्टी नेताओं के सामने शाह ने उठाए थे और कुछ चुनौतियों से भी दो-चार हुए थे। अब यही चुनौतियां शाह के सामने और सघन होकर उभरी हैं।
शाह के सामने पहली चुनौती पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय करने की है। 2006 की रथ यात्रा की कमान पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के हाथों में थी। वरिष्ठ नेता बची सिंह रावत को विजन डाक्यूमेंट में व्यस्त दिख रहे हैं।