उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और लोकहित में लिए गए फैसलों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आंकड़ों और रिसर्च वर्क पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व से लेकर बूथ स्तर तक सोशल मीडिया पर सक्रियता युद्ध की तरह से बढ़ाई जाए। इस दौरान भाजपा के महामंत्री संगठन रामलाल, सह महामंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, राष्ट्रीय सचिव तीरथ सिंह रावत, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व सांसद अनिल बलूनी और सोशल मीडिया के राष्ट्रीय संयोजक अजय मालवीय व महानगर अध्यक्ष विनय गोयल समेत कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
देख लो आसपास कोई बाहर वाला न हो
सोशल मीडिया स्वयंसेवकों की बैठक से मीडिया को पूरी तरह से दूर रखा गया था। शाह का संबोधन शुरू होने से पहले फोटो पत्रकारों को कुछ तस्वीरें लेने की इजाजत दी गई। लेकिन जैसे ही शाह का संबोधन शुरू हुआ, मीडिया को प्रेक्षागृह से बाहर जाने को कह दिया गया। पार्टी प्रभारी श्याम जाजू ने स्वयंसेवकों को यह कहकर चौकस किया कि वे अपने आसपास देख लें कि कोई बाहर वाला न बैठा हो। यह बैठक पूरी तरह से गोपनीय रखी गई। शाह की पाठशाला से गोपनीयता का सबक सीख कर लौटे स्वयंसेवकों ने भी बहुत ज्यादा मुंह नहीं खोला।
हर बूथ में पांच स्मार्ट फोन
शाह ने कहा कि सोशल मीडिया पर निचले स्तर तक सक्रियता बढ़ाने के लिए लोकसभा व विधानसभा के अलावा बूथ स्तर पर कम से कम पांच ऐसे स्वयंसेवकों को जोड़ना होगा, जिनके पास स्मार्ट फोन हो।
मुख्यधारा की मीडिया पर तंज
सम्मेलन में शाह मुख्यधारा की मीडिया पर तंज कसने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा कि यह मीडिया व्यक्ति तो व्यक्ति, घोड़े को भी हीरो बना देता है। उनका इशारा शक्तिमान घोड़े की ओर था, जिसकी कहानी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर खूब सुर्खियों में रही थी।
एक साल की उम्र में 18 साल की दुल्हन नहीं लाई जा सकती
सम्मेलन के दौरान शाह ने विपक्षी दलों के गठबंधन पर यह कहकर व्यंग किया कि विवाह की उम्र 21 वर्ष की होती है। एक-एक साल की आयु वाले जो 21 दल खड़े हुए हैं, वे 18 साल की दुल्हन नहीं ला सकते। उन्होंने कहा कि ममता बैनर्जी या देवगौड़ा अपने राज्य से बाहर यूपी में क्या कर सकते हैं। उत्तरप्रदेश में उनकी गारंटी है कि वहां 73 से 74 सीटें होंगी, 72 नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष से जनता को कोई उम्मीद नहीं है। जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं हैं। इसलिए इन अपेक्षाओं को पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है।
कम ही थीं महिला सोशल मीडिया स्वयंसेवक
बैठक में जुटे स्वयंसेवकों की भीड़ में कम ही महिला स्वयंसेवक उपस्थित थीं। बैठक में सबसे अधिक स्वयं सेवक हरिद्वार और सबसे कम (एक) रुद्रप्रयाग से पहुंचे थे।