डॉ. सोना कौशल गुप्ता, न्यूरो साइक्लोजिस्ट
बच्चों से रोका टोकी कम करें
अपने बच्चों को प्रोजेक्ट न बनाएं कि वह क्या कर रहा है कहां बैठ रहा है उस पर ज्यादा रोक टोंक न लगाएं। हालांकि बच्चों पर नजर रखें। अगर वह गलत कर रहा है तो उसे प्यार से समझाएं।
अपनी उम्मीदें बच्चों पर न थोपें
कुछ अभिभावक अपनी उम्मीदों को बच्चों पर थोप देते हैं। जो वह नहीं कर पाया वह उनके बच्चे करेंगे। ऐसे में बच्चों से उम्मीद अधिक लगा लेते हैं। जब बच्चा उम्मीद पर खरा नहीं उतरता तो उसे डांटते हैं। इससे बच्चे में तनाव बढ़ता है।
एक पेपर के बाद दूसरे की तैयारी का मौका दें
बच्चा जो पेपर देकर आता है अभिभावक उस पेपर के बारे में बच्चे से पूछते हैं। बच्चे का पेपर अच्छा नहीं हुआ होता है तो उसको डांटते हैं। इससे बच्चे में तनाव बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चा अगले पेपर की तैयारी नहीं कर पाता है। इसलिए अभिभावक इस बात का ध्यान रखें।
बच्चों पर गुस्सा न करें
अभिभावकों की बात जब बच्चा नहीं मानता है तो अभिभावक गुस्सा करते हैं। लेकिन गुस्सा न करें। बच्चों की बात को समझने की कोशिश करें कि बच्चा शायद अपनी जगह सही है। जब गुस्सा शांत हो तो बच्चे से प्यार से बात करें।
लोगों की परवाह करने की बजाय बच्चे पर ध्यान दें
अभिभावकों सबसे अधिक चिंता यह होती है कि बच्चे के बारे में लोग क्या कहेंगे अगर बच्चा अच्छे नंबर नहीं लाएगा। ऐसे में लोगों की चिंता करने की बजाय अपने बच्चे पर और उसकी सेहत पर ध्यान दें।
खानपान और नींद का रखें ख्याल
परीक्षा के समय बच्चों को पूरी नींद लेना जरूरी है। इसके लिए रात 11 बजे तक सो जाएं और सुबह पांच बजे उठकर पढ़ाई करें। इसके अलावा इन दिनों कहीं टूर या शादी में जाने का प्लान न बनाएं। बच्चे को हल्का और सुपाच्य भोजन करवाएं।
अभिभावकों के सवाल :
सवाल- बच्चों को समझाते हैं तो वह समझते नहीं हैं। इससे हमें गुस्सा आता है। समझ नहीं आता बच्चे गलत हैं या हम। - मीनू, अभिभावक
जवाब- माता पिता गुस्सा करेंगे, तो बच्चे भी गुस्सा करेंगे। उस समय उनके मन की बात करो अगर वह नहीं समझ रहा है तो उसके शांत होने के बाद उसे प्यार से समझाओ। इसके अलावा बच्चों को स्पोटर्स और फिजिकल एक्टिविटी में जरूर डालें। इससे उनकी एनर्जी दूसरी ओर भी जाएगी। ऐसे बच्चों को कम गुस्सा आता है।
सवाल- बच्चे कहते हैं आप नहीं समझोगे, आप पुराने जमाने के हो। बच्चों से संवाद कैसे करें?- रंजना
जवाब- बच्चों के साथ किसी रिश्ते को कंट्रोल ना करें। माता-पिता यह ना सोचें कि जो वो चाहते हैं वही होगा। संवाद का मतलब है कि अगर बच्चों से बात करनी है तो पहले ये भी सोचना होगा कि बच्चे जो बोल रहे हैं, उसका आशय क्या है। अगर इस नजरिये से सोचकर आप उसकी बात सुनोगे तो आपको उनका भाव पता चलेगा। बच्चों को जब अहसास होगा माता पिता जो बोल रहे हैं, उसमें मेरा फायदा है ना कि माता पिता का, तो बच्चा आपकी हर बात सुनेगा।
बच्चों के सवाल:
सवाल- पढ़ने का सही समय क्या है, रात को पढ़ने पर नींद आती है, सुबह हम उठ नही पाते:- पायल
जवाब- पढ़ने का सही समय सुबह ही है। माता पिता रात को 11 बजे तक बच्चों को सुला दें और सुबह पांच बजे उठा दें। रात के समय रिलेक्स रहना चाहिए।
सवाल- इंटर की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कैसे करें: तुषार
जवाब- एनसीईआरटी की किताबें अच्छे से पढ़ी हैं तो आप किसी भी प्रतियोगी परीक्षा को पास कर सकते हैं। पिछले दो साल का अपना कोर्स अच्छे से पूरा पढ़ ले। बच्चे को किसी एक भाषा में मजबूत होना होगा। अपनी मातृभाषा हिंदी का मजबूत होना काफी जरुरी है।
सवाल- परीक्षा में सवाल देखने के बाद जवाब भूल जाते है, जबकि उसका जवाब हमें आता होता है: नलिनी
जवाब- परीक्षा में सबसे पहले पेपर पढ़कर मन शांत करें। लंबी सांस लेकर प्रश्न पत्र पढ़े। परीक्षा के समय इधर-उधर मत देखो, केवल अपने पेपर पर फोकस करो। प्रश्न पत्र में सबसे पहले जो सवाल आता है वो करें। उसके बाद दूसरा प्रश्न करें।