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Amar Ujala Samvad: सीबीएसई बोर्ड परीक्षा से पहले विशेषज्ञों ने दिए खास टिप्स, कहा-घबराएं नहीं, ऐसे करें तैयारी

Wed, 31 Jan 2024 10:17 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

बुधवार को पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, आईएमए में अमर उजाला की ओर से संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सीबीएसई बोर्ड के दसवीं, 12वीं के छात्रों और अभिभावकों के अलावा अन्य छात्रों और अभिभावकों से संवाद हुआ।
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अमर उजाला संवाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रश्नपत्र में जो प्रश्न सरल हैं, उन्हें पहले हल करें। एक प्रश्न हल करने में अधिक समय न लगाएं। अपने काम पर फोकस करते हुए आगे बढ़े। दिमाग को दुरुस्त रखने के लिए पौष्टिक आहार और रात को पूरी नींद लें। मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करें इससे तनाव नहीं होगा। यह सभी विचार बुधवार को विशेषज्ञों ने सीबीएसई बोर्ड के छात्रों के समक्ष रखे। अभिभावकों से कहा कि बच्चों पर बोर्ड परीक्षा को लेकर दबाव न बनाएं। अपनी उम्मीदों का बोझ बच्चों पर न डालें।

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संवाद में सीबीएसई बोर्ड के संयुक्त सचिव रणबीर सिंह, विद्यालय के प्रधानाचार्य माम चन्द, सीबीएसई काउंसलर डॉ. सोना कौशल गुप्ता, दून मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील ओझा मौजूद रहे। बोर्ड परीक्षा को लेकर बच्चों और अभिभावक ने सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की। वहीं विशेषज्ञों ने अपने विचारों से सभी को लाभान्वित किया।

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रणबीर सिंह, संयुक्त सचिव, सीबीएसई

सबसे पहले सरल प्रश्न हल करें 
बोर्ड परीक्षा नजदीक है, लेकिन घबराएं नहीं और आत्मविश्वास के साथ पढा़ई करें। प्रश्नपत्र में जो प्रश्न सरल हैं उन्हें पहले हल करें। एक प्रश्न में अधिक समय न लगाएं। इसके अलावा परीक्षा में व्हाट्सएप के मैसेज वाली शॉर्ट लैंग्वेज का उपयोग न करें।

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कम करें
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें लेकिन टेक्नोलॉजी को अपना समय दान न करें। मोबाइल का अधिक उपयोग तनाव ग्रस्त बनाता है। मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करेंगे तभी हर चीज को सही समय पर कर सकेंगे।

बच्चों को संस्कार दें
अपने बच्चों को संस्कार का विजिटिंग कार्ड दीजिए। संस्कार बच्चों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। अभिभावक अपने बच्चों को समय दें और उन्हें अपने संघर्ष के साथ ही तीन पीढ़ियों के संघर्ष से रूबरू करवाएं। आपका बच्चा आपके संघर्ष से रूबरू होगा तो वह आपका साथ कभी नहीं छोड़ेगा। बच्चों से भी कहा कि दुनिया में अपने माता-पिता और गुरु को सर्वोपरि मानिए।

गायत्री मंत्र बच्चों को ऊर्जा देगा
बच्चों को धर्म और ग्रंथों का ज्ञान होना जरूरी है। सुबह शाम गायत्री मंत्र पढ़ना चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इससे बच्चों का विश्वास और स्वाभिमान मजबूत होगा।

बच्चों को प्यार से ट्रीट करें
बच्चों को डांटने की बजाय उन्हें प्यार से ट्रीट करें। अपने बच्चे की दूसरे बच्चे से तुलना न करें। आपका बच्चा अगर सुबह उठकर पढ़ रहा है तो आपको भी साथ देना होगा। बच्चे को रात में 11 बजे तक सुला दें और सुबह पांच बजे उठा दें।

दीक्षा पोर्टल पर देखें गणित का सवाल
गणित का सवाल नहीं आ रहा है तो दीक्षा पोर्टल पर जाकर बच्चे सवाल का जवाब ले सकते हैं। इसके अलावा यूट्यूब देख सकते हैं और स्कूल के टीचर से व्हाट्सएप पर बात करके अपनी समस्या सुलझा सकते हैं।

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए पढ़ें एनसीईआरटी
जो छात्र प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं वह घबराएं नहीं। अगर छात्रों ने 11वीं और 12वीं की एनसीईआरटी की किताबें सही से पढ़ी हैं तो कोई भी प्रतियोगी परीक्षा हल कर सकते हैं।

डॉ. सोना कौशल गुप्ता, न्यूरो साइक्लोजिस्ट


बच्चों से रोका टोकी कम करें
अपने बच्चों को प्रोजेक्ट न बनाएं कि वह क्या कर रहा है कहां बैठ रहा है उस पर ज्यादा रोक टोंक न लगाएं। हालांकि बच्चों पर नजर रखें। अगर वह गलत कर रहा है तो उसे प्यार से समझाएं।

अपनी उम्मीदें बच्चों पर न थोपें
कुछ अभिभावक अपनी उम्मीदों को बच्चों पर थोप देते हैं। जो वह नहीं कर पाया वह उनके बच्चे करेंगे। ऐसे में बच्चों से उम्मीद अधिक लगा लेते हैं। जब बच्चा उम्मीद पर खरा नहीं उतरता तो उसे डांटते हैं। इससे बच्चे में तनाव बढ़ता है।

एक पेपर के बाद दूसरे की तैयारी का मौका दें
बच्चा जो पेपर देकर आता है अभिभावक उस पेपर के बारे में बच्चे से पूछते हैं। बच्चे का पेपर अच्छा नहीं हुआ होता है तो उसको डांटते हैं। इससे बच्चे में तनाव बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चा अगले पेपर की तैयारी नहीं कर पाता है। इसलिए अभिभावक इस बात का ध्यान रखें।

बच्चों पर गुस्सा न करें
अभिभावकों की बात जब बच्चा नहीं मानता है तो अभिभावक गुस्सा करते हैं। लेकिन गुस्सा न करें। बच्चों की बात को समझने की कोशिश करें कि बच्चा शायद अपनी जगह सही है। जब गुस्सा शांत हो तो बच्चे से प्यार से बात करें।

लोगों की परवाह करने की बजाय बच्चे पर ध्यान दें
अभिभावकों सबसे अधिक चिंता यह होती है कि बच्चे के बारे में लोग क्या कहेंगे अगर बच्चा अच्छे नंबर नहीं लाएगा। ऐसे में लोगों की चिंता करने की बजाय अपने बच्चे पर और उसकी सेहत पर ध्यान दें।

खानपान और नींद का रखें ख्याल
परीक्षा के समय बच्चों को पूरी नींद लेना जरूरी है। इसके लिए रात 11 बजे तक सो जाएं और सुबह पांच बजे उठकर पढ़ाई करें। इसके अलावा इन दिनों कहीं टूर या शादी में जाने का प्लान न बनाएं। बच्चे को हल्का और सुपाच्य भोजन करवाएं।

डॉ. सुशील ओझा, नेत्र रोग विशेषज्ञ

स्क्रीन टाइम कम रखें
इन दिनों मोबाइल और लैपटॉप के उपयोग से बच्चों में स्क्रीन देखने का समय ज्यादा बढ़ रहा है। इससे बच्चों की आंखें खराब हो रही हैं। बहुत जरूरी है कि परीक्षा के समय किताबों से भी पढ़े और स्क्रीन का उपयोग कम करें। इससे सिर दर्द, थकान और तनाव की समस्या कम होगी।

फिजिकली एक्टिविटी बढ़ाएं
आजकल के बच्चों में फिजिकल एक्टिविटी की कमी हो गई है जो सेहत के लिए हानिकारक है। बच्चों को फिजिक एक्टिव रहना चाहिए।

बच्चों के दिमाग को शांत रखें
परीक्षा के समय बहुत जरूरी है कि बच्चों के दिमाग को शांत रहने का मौका मिले ताकि वह अपनी पढ़ाई पर फोकस कर सकें। इसके लिए बच्चों से बहस न करें। उन्हें अपनी बात रखने का मौका दें और उनकी बात को समझें। पॉजिटिव रहने के लिए भजन सुनें।

फिजिकल एक्टिविटी से गुस्सा कम हो सकता
यह देखा गया है कि बच्चों को स्पोर्ट्स और फिजिकली एक्टिव रहना जरूरी है। इससे बच्चों को गुस्सा कम आता है। बच्चे जब अपनी एनर्जी दूसरे काम लगाएंगे तो उन्हें फालतू की बातों पर गुस्सा नहीं आएगा

पांच-दस मिनट पहले पहुंचे परीक्षा केंद्र पर

समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंचने से बढ़ता है तनाव
छात्रों को टिप्स देते हुए पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, आईएमए के प्राचार्य माम चन्द ने कहा, परीक्षा केंद्र पर समय से पांच-दस मिनट पहले पहुंचे। समय पर न पहुंचने से तनाव बढ़ता है। इसके पढ़ा हुआ भी याद नहीं रहता। इसके अलावा परीक्षा के लिए पढ़ने का एक समय तय कर लें। साथ ही सैंपल पेपर और मॉडल पेपर से तैयारी करने के साथ रिवीजन पर विशेष ध्यान दें।

अमर उजाला की पहल को सराहा
सीबीएसई के संयुक्त सचिव रणबीर सिंह ने कहा, परीक्षा के दिनों में बच्चों के साथ ही अभिभावकों के साथ संवाद की पहल अमर उजाला ने की है, जो कि सराहनीय है। उन्होंने कहा, अमर उजाला सिर्फ अखबार नहीं है यह समाचार पत्र अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी समझता है।

बच्चों ने बताया सीएस राधा रतूड़ी- डीएम का नाम है सोनिका
संवाद कार्यक्रम के दौरान उमर उजाला की ओर से बच्चों से सवाल जवाब भी किए गए। सवाल पूछने पर बच्चों ने बताया कि अमर उजाला की स्थापना के 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं, वहीं उत्तराखंड की पहली महिला चीफ सेकेटरी का नाम पूछे जाने पर राधा रतूड़ी और डीएम देहरादून का नाम भी बच्चों ने सोनिका बताया।

अभिभावकों के सवाल :

सवाल- बच्चों को समझाते हैं तो वह समझते नहीं हैं। इससे हमें गुस्सा आता है। समझ नहीं आता बच्चे गलत हैं या हम। - मीनू, अभिभावक
जवाब- माता पिता गुस्सा करेंगे, तो बच्चे भी गुस्सा करेंगे। उस समय उनके मन की बात करो अगर वह नहीं समझ रहा है तो उसके शांत होने के बाद उसे प्यार से समझाओ। इसके अलावा बच्चों को स्पोटर्स और फिजिकल एक्टिविटी में जरूर डालें। इससे उनकी एनर्जी दूसरी ओर भी जाएगी। ऐसे बच्चों को कम गुस्सा आता है।

सवाल- बच्चे कहते हैं आप नहीं समझोगे, आप पुराने जमाने के हो। बच्चों से संवाद कैसे करें?- रंजना
जवाब- बच्चों के साथ किसी रिश्ते को कंट्रोल ना करें। माता-पिता यह ना सोचें कि जो वो चाहते हैं वही होगा। संवाद का मतलब है कि अगर बच्चों से बात करनी है तो पहले ये भी सोचना होगा कि बच्चे जो बोल रहे हैं, उसका आशय क्या है। अगर इस नजरिये से सोचकर आप उसकी बात सुनोगे तो आपको उनका भाव पता चलेगा। बच्चों को जब अहसास होगा माता पिता जो बोल रहे हैं, उसमें मेरा फायदा है ना कि माता पिता का, तो बच्चा आपकी हर बात सुनेगा।
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बच्चों के सवाल:

सवाल- पढ़ने का सही समय क्या है, रात को पढ़ने पर नींद आती है, सुबह हम उठ नही पाते:- पायल
जवाब- पढ़ने का सही समय सुबह ही है। माता पिता रात को 11 बजे तक बच्चों को सुला दें और सुबह पांच बजे उठा दें। रात के समय रिलेक्स रहना चाहिए।

सवाल- इंटर की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कैसे करें: तुषार
जवाब- एनसीईआरटी की किताबें अच्छे से पढ़ी हैं तो आप किसी भी प्रतियोगी परीक्षा को पास कर सकते हैं। पिछले दो साल का अपना कोर्स अच्छे से पूरा पढ़ ले। बच्चे को किसी एक भाषा में मजबूत होना होगा। अपनी मातृभाषा हिंदी का मजबूत होना काफी जरुरी है।

सवाल- परीक्षा में सवाल देखने के बाद जवाब भूल जाते है, जबकि उसका जवाब हमें आता होता है: नलिनी
जवाब- परीक्षा में सबसे पहले पेपर पढ़कर मन शांत करें। लंबी सांस लेकर प्रश्न पत्र पढ़े। परीक्षा के समय इधर-उधर मत देखो, केवल अपने पेपर पर फोकस करो। प्रश्न पत्र में सबसे पहले जो सवाल आता है वो करें। उसके बाद दूसरा प्रश्न करें।
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