सत्र बदलते रहे, कम नहीं हुआ श्रोताओं का उत्साह
होटल सरोवर का नजारा रविवार को बदला हुआ था। गेट के बाहर से लेकर अंदर तक गाड़ियों की कतार आयोजन की सफलता को बयां कर रही थी। राज्यभर के गणमान्य नागरिक और प्रदेश के विकास की इबारत लिखने वाला हर चेहरा हाॅल में नजर आ रहा था। एक के बाद एक सत्र का आयोजन होते रहे, लेकिन श्रोताओं का उत्साह कमजोर नहीं पड़ा। पहले सत्र में स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज से लेकर अमोघ लीला प्रभु के विचार सुनने को लेकर उत्साह रहा तो सीएम पुष्कर सिंह धामी के आगमन पर उत्साह और भी बढ़ गया, लेकिन यह किसी भी सत्र में कमजोर नहीं पड़ा। पैरालंपिक खिलाड़ियों की कहानी सुनकर तो हर किसी के रौंगटे खड़े हो गए। उधर, जॉन अब्राहम के सत्र को लेकर उत्साह अंतिम पलों तक कायम रहा।
पैरालंपिक खिलाड़ियों की खुशी का नहीं रहा ठिकाना
संवाद में हर वर्ग के लोग पहुंचे, लेकिन भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ी डॉ. दीपा मलिक, देंवेंद्र झाझरिया व मुरलीकांत पेटकर को सुनने के लिए दून समेत आसपास के इलाकों से पैरा खिलाड़ी भी पहुंचे। अपनी प्रेरणा और आदर्श खिलाड़ियों को अपने बीच पाकर पैरा खिलाड़ियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पैरालंपिक खिलाड़ियों ने भी अपनी कहानियों के जरिए खूब उत्साह भरा। डॉ. दीपा मलिक ने कहा, जज्बा बनाकर रखिए, जो लोग आपको दिव्यांग कहते हैं, वही कल आप पर गौरवान्वित होंगे। वहीं, उन्होंने उत्तराखंड के दिव्यांग बच्चों के मैदान बनाने का संकल्प दोहराया तो हाल तालियों से गूंज उठा। फ्रीस्टाइल तैराकी में पहला पैरालंपिक स्वर्ण पदक दिलाने वाले पद्मश्री मुरलीकांत पेटकर ने जब बताया कि उनकी रीढ़ की हड्डी में आज भी एक गोली है, तो हर कोई हैरान रह गया। मुरलीकांत के जीवन पर बनी फिल्म चंदू चैंपियन के कारण हर कोई उनकी कहानी जानने को उत्साहित रहा।
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मिलने का उत्साह, सेल्फी का क्रेज
हर सत्र में पहुंचे खास वक्ताओं को सुनने का ही क्रेज नहीं था, बल्कि उनके साथ सेल्फी लेने व उनसे मिलने का भी उत्साह लोगों में कम नहीं था। स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज हों या दीपा मलिक या देवेंद्र झाझरिया या फिर मुरलीकांत पेटकर से लेकर क्रिकेटर शमी। सभी के प्रशंसकों में भरपूर जोश था।
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नई पीढ़ी, संतों के विचारों को किया आत्मसात
स्वामी गोविंददेव गिरी ने जब कहा कि महाभारत के बजाय महान भारत के निर्माण में सहभागी बनें, तो युवाओं ने स्वामीजी के विचारों का तालियों से स्वागत किया। वहीं, स्वामी अमोघ लीला प्रभु ने वर्तमान जीवन को सुधारने की नसीहत दी। युवाओं ने कहा, संवाद के मंथन में विचारों का जो अमृत प्राप्त हुआ है वह उनके जीवन को नई दिशा देगा।