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Samvad: अल्ट्राटेक सीमेंट के प्रेजिडेंट बोले-दूसरों से सीखना अच्छी बात, पर उत्तराखंड के विकास का हो अपना मॉडल

Mon, 05 Aug 2024 12:36 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

उत्तराखंड के विकास का मॉडल कहां से आना चाहिए, सवाल का जवाब देते हुए अजय डांग ने कहा कि औरों से सीखना अच्छी बात है। पर मॉडल अपना होना चाहिए। राज्य में क्या खास है इसको ध्यान में रखते हुए यूनिक मॉडल बनाना चाहिए।
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अमर उजाला संवाद में अल्ट्राटेक सीमेंट के मार्केटिंग हेड अजय डांग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पहाड़ों से पलायन रोकने को उद्योगों के लिए ईको सिस्टम विकसित करने की सख्त जरूरत है। उत्तराखंड के विकास का अपना यूनिक मॉडल होना चाहिए। यह बात अल्ट्रा टेक सीमेंट के प्रेजिडेंट एंड मार्केटिंग हेड अजय डांग ने अमर उजाला संवाद में कारोबार में शिखर तक विषय पर मंच साझा करते हुए कही। कहा कि विकास के लिए पूंजी, जमीन और प्राकृतिक संसाधन भी जरूरत होती है। लोग मूल निवासी हो सकते हैं, लेकिन पूंजी कहीं की मूल निवासी नहीं होती। ऐसे में पूंजी के लिए इंतजाम जरूरी हैं।

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उत्तराखंड के विकास का मॉडल कहां से आना चाहिए, सवाल का जवाब देते हुए अजय डांग ने कहा कि औरों से सीखना अच्छी बात है। पर मॉडल अपना होना चाहिए। राज्य में क्या खास है इसको ध्यान में रखते हुए यूनिक मॉडल बनाना चाहिए। कहा कि सड़कें पहुंचेंगी तो कारोबार पहुंचेगा और पर्यटन समेत सभी विकास के रास्ते खुलेंगे। इसी से स्थानीय उद्यमशीलता भी बढ़ेगी। उन्होंने विकास बनाम विनाश को लेकर होने वाली बहस का जवाब देते हुए कहा कि संतुलन को ध्यान में रखते हुए विकास को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने राज्य के विकास के लिए पूंजी निर्माण पर फोकस करने की बात कही।

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कहा कि हमें बाहरी निवेशकों को भी लाना होगा और साथ ही स्थानीय उत्पादों को भी प्रमोट करना होगा। यह निवेश निजी क्षेत्र और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का जितना ज्यादा होगा, उतनी की राज्य की पहचान तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों के जरिए हर शहर में रोजगार के अवसर बनाने होंगे। इसके बिना एक शहर से दूसरे शहर और एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन होता रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभावान युवा अगर पलायन कर रहे हैं तो उन्होंने रोकने के लिए नीतियां और योजनाएं बनानी होंगी। उन्होंने भू कानूनों पर बात करते हुए कहा कि यह राज्य के लोगों को तय करना है कि उन्हें किस तरह की और कितनी कीमत पर विकास का ढांचा खड़ा करना है। क्योंकि विकास के लिए जमीनें भी लगेंगी, प्राकृतिक संसाधन भी चाहिए होंगे। पूंजी जहां आए, वहां उसका स्वागत होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को लोग ज्यादातर धार्मिक पर्यटन के कारण जानते हैं। धार्मिक पर्यटन और अन्य सकारात्मक वातावरण के चलते उत्तराखंड राज्य निवेश के लिहाज से अनुकूल है। उन्होंने कहा कि दुनिया में आध्यात्मिक एवं धार्मिक पर्यटन का सबसे ज्यादा शेयर है। लेकिन हमें यह समझना होगा कि धरोहरों को कुछ सालों के लिए भुनाना नहीं है। बल्कि इसे संभालकर और संजोकर रखना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश के इतिहास में प्राचीनतम है, लेकिन नया राज्य है। इसलिए यहां धीरे-धीरे विकास होगा। हालांकि अन्य पर्वतीय राज्यों के मुकाबले उत्तराखंड का विकास कहीं अधिक है। जो अच्छा संकेत है।

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