अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में तेज गेंदबाज शमी ने राजनीति में जाने की ओर इशारा किया। सवालों की गुगली पर उन्होंने खूब चौके-छक्के लगाए।
क्रिकेट की पिच पर सनसनाती गेंदों से विरोधी खिलाड़ियों की सांसें अटकाने के लिए मशहूर भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी क्रिकेट के बाद राजनीति की पारी खेलने के लिए भी तैयार हैं। शमी ने कहा, अगर वह क्रिकेटर नहीं होते तो राजनीति में होते, क्योंकि उनके पिता और दादा भी राजनीति के जरिए जनसेवा करते रहे हैं। वह खुद भी हमेशा क्रिकेट नहीं खेल सकते।
रविवार को अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में शमी ने कुछ ऐसे ही संकेत दिए। तेज और घुमावदार सवालों के जवाब उन्होंने जिस बेबाकी के साथ दिया, लगा मानो पिच पर स्लॉग ओवर में चौके-छक्के लगा रहे हों। कार्यक्रम को मॉडरेट कर रहे अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कार्णिक ने उन्हें कुछ प्रश्नों की गुगली फेंकी तो शमी ने उसी अंदाज में जवाबी बैटिंग की और छा गए।
फिलहाल चोट से उबरने की कोशिश कर रहे शमी ने कहा, खेल में वापसी और चोटों से उबरने का सिलसिला खिलाड़ी के साथ चलता रहता है। बड़ी चोट के बाद रिकवरी में लंबा समय लगता है, ऐसे में आपको कड़ी मेहनत करने के साथ खुद पर विश्वास बनाकर रखना पड़ता है।
‘जो ताना देते थे, आज उनकी आंख में आंसू देखे’
शमी ने कहा, सफलता के पीछे उनके माता-पिता की कड़ी मेहनत और विश्वास है। पिता उनके रोल मॉडल हैं, जो किसान थे, लेकिन उन्होंने कभी खेलने पर रोका-टोका नहीं। जो रिश्तेदार खेलने को टाइम खराब बताते और बिगड़ने का ताना देते थे, उन्हीं को भारतीय टीम में खेलने के बाद आंखों में आंसू लिए देखना मेरे लिए कभी न भूलने वाले पल है, इसलिए युवाओं को संदेश है कि आप अपने लक्ष्य के लिए अपने स्तर पर इतनी मेहनत करें कि आपके सामने कोई सवाल टिक न सके।
‘प्रैक्टिस के लिए तीन बसें बदल कर जाता था’
शमी ने कहा, उत्तर प्रदेश में गांव के परिवेश में पला-बढ़ा, जहां से प्रैक्टिस करने के लिए 35 किमी जाना पड़ता था। उसमें भी सीधे ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं थी। अक्सर तीन बस बदलकर जाना होता था, तब यूपी का माहौल कैसा था, यह सभी जानते हैं, इसलिए यूथ से कहना चाहूंगा कि हर जगह सुविधाएं उपलब्ध होना संभव नहीं है।
‘छोटे मैदान में भी स्किल डेवलप हो सकती’
उन्होंने उत्तराखंड के युवाओं को संदेश दिया कि छोटे मैदान में भी स्किल डेवलप हो सकती है। आजकल ऑनलाइन माध्यम से भी स्किल सीखने में मदद मिलती है। यूथ को बस खुद पर विश्वास रखकर कड़ी मेहनत करनी है। जब भी मौका मिले तो अकादमी जाकर सीख सकते हैं। यह भी जरूर करें कि अपनी फील्ड के अनुभवी लोगों से हमेशा बात करें, उनसे काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
ये भी पढ़ें...Amar Ujala: संवाद के मंथन में निकला विचारों का अमृत, विकास की नई नींव, युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक बने साक्षी
‘पाकिस्तान के सवालों की गेंद आज भी रखी है’
शमी से पूछा गया कि उनकी गेंदबाजी के कहर से तिलमिलाए पाकिस्तान की ओर से बयान आया था कि उनको दी गई बॉल में कोई डिवाइस लगी थी। इस पर शमी ने मुस्कुराते हुए कहा, वह गेंद आज भी उनके पास रखी है। उन्होंने जवाब में एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर अपलोड किया था, उसका जवाब आए तो वह आगे जवाब देने को तैयार हैं।