गंगा का स्मरण और दर्शन मात्र से होते हैं पवित्र : गोविंद दास
पंचायती बड़ा अखाड़ा के महंत गोविंद दास महाराज ने कहा, गंगा का स्मरण और दर्शन मात्र से मनुष्य पवित्र हो जाता है। कुंभ का हमारे शास्त्रों में बहुत ही महत्व है। प्राचीन परंपरा रही है कि धर्म की सत्ता साधु-संतों के पास होती है, लेकिन धर्म की रक्षा करना राज सत्ता का काम है। साधु का काम जनकल्याण करना है। कुंभ में एक घाट पर साधु-संत स्नान करते हैं, वहीं दूसरे घाट पर पक्षी और पशु स्नान करते देखे जा सकते हैं। कुंभ मनुष्य के साथ जीव प्राणी का भी है। नदियों की दूषित होने से बचाना होगा। आज लोग स्नान कर अंग वस्त्र वहीं फेंक देते हैं। लोगों को लगता है पाप अंगवस्त्र में है। गंगा और यमुना हमारी धरोहर हैं। इनकी पवित्रता को बनाए रखना है।
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए धार्मिक चेतना की जरूरत : नितिन
गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा, गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए धार्मिक चेतना की जरूरत है। हमें इस बात को समझना होगा कि गंगा धरती पर क्यों आईं। यह तो स्वर्ग लोक में बहने वाली मां गंगा थीं। धरती में कोई ऐसा तत्व नहीं था, तो स्वर्ग तारण करे। इसलिए मां गंगा का आह्वान किया गया। तब गंगा धरती पर प्रकट हुई। शास्त्रों में कहा गया कि शिव की जटाओं में गंगा है। गंगा जल में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का तत्व देखने को मिलता है। गंगा प्रदूषित होगी तो पूरी सनातन धर्म पर प्रभाव देखने को मिलेगा। प्रकृति में प्रकृति का मिलन होता है, तो प्रदूषण नहीं होता, लेकिन मानवीय अपशिष्ट मिलने पर गंगा प्रदूषित होती है।
नियमित योग का लें संकल्प: आचार्य अर्शदेव
पतंजलि योगपीठ के आचार्य अर्शदेव ने योग के महत्व को बताया। कहा, पूर्ण कुंभ पर हमें सभी को नियमित योगाभ्यास का संकल्प लेना होगा। योग भी हमारी प्राचीन संस्कृति से जुड़ा है। योगाभ्यास से हम खुद को स्वस्थ व निरोग रख सकते हैं। हमारी धर्मों में स्नान, तप व स्वाध्याय की परंपरा रही है। घर पर योगाभ्यास करना नुकसानदायक नहीं है, लेकिन योग की क्रियाएं सही होनी चाहिए। बाबा रामदेव योग से हर बीमारियों को दूर करने के बारे में बताते हैं। योग संजीवनी है। कुंभ पर योग का संकल्प लें।
गंगा के प्रति मां का भाव लाने की जरूरत : उज्जवल पंडित
युवा पंडा समाज के अध्यक्ष उज्जवल पंडित ने पंडों की भूमिका के बारे में जानकारी दी। कहा, हमें गंगा को समझना होगा। स्वामी विवेकानंद शिकागो गए तो उनसे सवाल किया पवित्र नदी कौन सी है। जवाब दिया कि यमुना है। उनके इस जवाब ने सवाल पूछने वाले ने आश्चर्य जताया। लोग गंगा को पवित्र नदी मानते हैं। इस पर विवेकानंद ने कहा, गंगा तो हमारी मां है। वह गंगा कैसी हो सकती है। हमें भी गंगा के प्रति इस तरह का भाव लाने की जरूरत है। गंगा जल सैकड़ों वर्ष तक खराब नहीं होता है।