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Palmistry: ज्योतिषाचार्यों ने बताए हाथों की लकीरों के राज, जुड़वा बच्चों समेत कई सवालों पर हुआ मंथन

सार

अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ के आखिरी दिन हस्तरेखा विज्ञान को लेकर विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इसमें ज्योतिषाचार्यों ने अपने अनुभव साझा किए।
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हस्तरेखा पर सत्र - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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ज्योतिष महाकुंभ में दूसरे दिन हस्तरेखा विज्ञान पर मंथन हुआ। जुड़वा बच्चों के हाथों की लकीरें, जन्म कुंडली समेत कई सवालों पर ज्योतिषाचार्यों ने चर्चा की। उन्होंने कहा कि मां के गर्भ से ही हस्तरेखा का निर्माण हो जाता है।

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ज्योतिषाचार्यों ने कहा कि भविष्य देखने के लिए जुड़वा बच्चों की कुंडली नहीं बल्कि हस्तरेखा का सहारा लेना होता है। पहले हाथ की रेखा लगभग एक जैसी हो सकती हैं लेकिन बाद में कर्म के अनुसार वो अलग-अलग होने लगती हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ. चंडीप्रसाद घिल्डियाल ने कहा कि हाथ की रेखा तो बाद का विषय है जिन लोगों को अनुभव होता है वे रेखा नहीं मस्तिष्क देखकर ही बता देते हैं।

यहां से ही एआई की संकल्पना भी आई है। दाया हाथ कर्म का हाथ होता है और बायां जन्म का। उन्होंने कहा कि एआई ज्योतिष सटीक नहीं है, इसके लिए हस्तरेखा, कुंडली का अध्ययन करना ही होगा।
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उन्होंने कहा कि महिलाओं का बांया और पुरुषों का दांया हाथ देखा जाता है। सभी के हाथ में सभी रेखा नहीं हो सकतीं। लंबा और पतला हाथ कल्पनाशील बनाता है। ऐसे लोग काम नहीं करते सिर्फ सोचते रहते हैं। हस्तरेखा पर आयोजित इस सत्र का संचालन अमर उजाला की पत्रकार अलका त्यागी ने किया।

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ईश्वर ने हाथ में ही बनाई जन्मकुंडली : त्रिपाठी
ज्योतिषाचार्य लक्ष्मीकांत त्रिपाठी ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली का विशेष महत्व है। जन्मकुंडली तब बनती है जब माता-पिता जन्म तारीख पंडित के पास लेकर जाते हैं। हाथ की रेखा तब बनती है जब बच्चा गर्भ में होता है। उन्होंने कहा कि कुंडली खो जाए तो मुश्किल होता है ऐसे में ईश्वर ने हाथ में ही ऐसी जन्मकुंडली बनाई है जिससे आप अपने जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए प्रश्न पूछ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हाथ देखना न जानते हो तो भी हाथ आपके बारे में काफी कुछ बताता है।

कर्म करोगे तो चमकेगा भाग्य : पैन्यूली
आचार्य डॉ. सुनील पैन्यूली ने कहा कि ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि ये उपाय करो लेकिन ये कभी नहीं कहते कि मानव होकर अच्छे कर्म करो। अच्छे कर्म करेंगे तो भाग्य चमकेगा। कर्मों से अपने भाग्य को और अच्छा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हस्तरेखा शास्त्र में कोई फेरबदल नहीं कर सकते।

पंचांग में काफी विविधता, पत्रियों में भी आती है कमी
आचार्य रामलखन गैरोला ने कहा कि सभी का दाहिना हाथ महत्वपूर्ण होता है, उसी से देखकर निर्णय लिया जाता है। हस्तरेखा और ज्योतिष दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। आज के समय में पंचांग में भी काफी विविधता है। इसके कारण पत्रियों में भी कमी आ जाती है। हस्तरेखा में हृदय रेखा, जीवन रेखा, भाग्य रेखा और वैवाहिक रेखा महत्वपूर्ण होती है।
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हाथ की रेखा से बनाई जा सकता है जन्मपत्री : शीतल शर्मा
आचार्य शीतल शर्मा ने कहा कि जो भी कार्य करते हैं वो हाथ से ही निर्धारित करते हैं। हाथ की रेखा से जन्मकुंडली बनाई जा सकती है लेकिन जन्मकुंडली से हाथ की रेखा का निर्माण नहीं किया जा सकता।

हस्तरेखा शास्त्र में बताए गए हैं 42 चिह्न
आचार्य खींवराज शर्मा ने कहा कि हाथों में चांद ही नहीं 42 चिह्न हस्तरेखा शास्त्र में बताए गए हैं। जिनकी स्तुति जिस पर्वत पर होगी, उसकी स्पष्टता का संबंध उसके काम के अनुसार ही कहा जाएगा।

हाथ में मकड़ी का जाल, सुखमय नहीं होगा पारिवारिक जीवन : माथुर
आचार्य सुनील माथुर ने कहा कि ज्योतिष में कई विधाएं हैं। यदि हाथ में मकड़ी का जाल है तो उसका पारिवारिक जीवन सुखमय नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जुड़वा बच्चों के हाथों की लकीरें एक जैसी होती हैं। इनकी रेखाएं अलग-अलग नहीं देखी जातीं।
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