हींग फेरुला एसाफोइटीडा के जड़ से निकाले गए रस से तैयार किया जाता है। यह इतना आसान नहीं एक बार जब जड़ों से रस निकाल लिया जाता है तब हींग बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। हींग दो तरह का होता है- काबुली सफेद और लाल। सफेद हींग पानी में घुल जाता है जबकि लाल या काला हींग तेल में घुलता है।
कच्चे हींग की गंध तीखी होती है। उसे खाने लायक नहीं माना जाता। खाने लायक गोंद और स्टार्च को मिलाकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तैयार किया जाता है। हींग की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें क्या मिलाया गया है। हींग पाउडर भी मिलता है। दक्षिण भारत में हींग को पकाया जाता है। पके हुए हींग के पाउडर का इस्तेमाल मसालों में किया जाता है।
प्रयोगशाला का कमाल
हिमाचल के पालमपुर में इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी के प्रयासों से राज्य के हिमालयी मरुस्थली क्षेत्र लाहुल घाटी के किसानों ने हींग की खेती को अपना लिया है।
भारत बड़ा बाजार
भारत हींग का बड़ा बाजार है। पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने पिछले साल करीब 1500 टन हींग आयात की। इस पर करीब 942 करोड़ खर्च हुए। यानी उत्तराखंड के सीमांत इलाकों में हींग की खेती होती है तो वहां के किसानों को फसल बेचने के लिए बाजार नहीं तलाशना होगा।
हमारी कोशिश है कि सीमांत क्षेत्रों में पारंपरिक खेती से हटकर ऐसी फसलों को प्रोत्साहित किया जाए जो वहां के लोगों की आमदनी में बढ़ाने में मदद करें। हींग इनमें से एक प्रमुख फसल है। इस संभावना पर विचार चल रहा है। डीआरडीओ की लैब्स को सीमांत इलाकों की खेती से जोड़ने पर चर्चा हुई थी। सरकार के स्तर पर प्रयास चल रहे हैं।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री