हिंदू जनमानस की आस्था के महापर्व कुंभ का आयोजन भव्य और विराट होना चाहिए लेकिन कोरोना को लेकर सरकार के दिशानिर्देशों का शत प्रतिशत पालन करते हुए। ऐसे समय में जब कोरोना से मानव सभ्यता ही खतरे में हो तब लोगों को मानवता के हित में खुद ही कुंभ में भीड़ लगाने से बचना चाहिए। बहुत आवश्यक होने पर ही कुंभ में स्नान के लिए हरिद्वार जाया जाए।
श्रद्धालु मास्क जरूर पहनें, सैनिटाइजर का उपयोग करें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। बेहतर तो यह है कि ऐसे माहौल में लोग घर पर ही गंगाजल का उपयोग करते हुए गंगा स्नान कर तन-मन को शुद्ध करें। कहा भी गया है कि मन चंगा तो कठौती में गंगा। आजकल डाकघरों के जरिये सरकार भी गंगाजल उपलब्ध कराती है।
उत्तराखंड और इसके आसपास के राज्य अपने अपने स्तर से इस बात का प्रयास करें कि कुंभ में भीड़ कम से कम जुटे। अपने राज्यों से बसें न बढ़ाएं, कुंभ के लिए स्पेशल ट्रेनों का संचालन न किया जाए। कुंभ में जाने से पहले और लौटने पर श्रद्धालुओं की अनिवार्य रूप से आरटीपीसीआर जांच की जाए।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच हरिद्वार में शुरू हो रहे कुंभ का स्वरूप कैसा हो। मौजूदा हालात में कुंभ कितना दिव्य कितना विराट हो। कौन से उपाय हों कि लाखों की संख्या में कुंभ में जुटने वाले श्रद्धालुओं की आस्था भी बनी रहे और वह कोरोना से भी बचे रहें। अमर उजाला ने इन तमाम विषयों को लेकर शनिवार को देहरादून और हल्द्वानी के अलग अलग क्षेत्रों और व्यवसायों से जुड़े युवाओं के साथ बेस वेबिनार किया। इस दौरान लोगों ने आस्था, व्यवस्था और कोरोना से बचाव को लेकर बेबाकी से अपनी राय रखी। प्रस्तुत हैं युवाओं के विचारों के प्रमुख अंश...
खुद जागरूक रहें और दूसरों को भी जागरूक करें
महाकुंभ हमारी संस्कृति का प्रतीक है। मौजूदा हालात में सरकार ने इसे तीन माह से एक माह का किया है और आरटीपीसीआर रिपोर्ट भी अनिवार्य की है। यह अच्छा कदम है। अब भीड़ के बीच संक्रमण से बचने के लिए लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वह कोरोना गाइडलाइन का अनिवार्य रूप से पालन करें और खुद भी जागरूक रहें और लोगों को भी जागरूक करें। डॉ. प्रगति वर्मा, एमबीबीएस-एमडी, हल्द्वानी।
पंजीकरण अनिवार्य करने से नियंत्रित होगी श्रद्धालुओं की भीड़
मौजूदा परिप्रेक्ष्य को देखते हुए सरकार के लिए कुंभ बड़ी चुनौती है। कुंभ से आस्था तो जुड़ी है, लेकिन हालात को देखते हुए लोगों को करोना से बचाव का भी ध्यान रखना होगा। सरकार को यह तय करना चाहिए कि एक दिन में कितने श्रद्धालु इस आयोजन में हिस्सा लें। इनका भी पंजीकरण ऑनलाइन हो। जिस तरह लोगों ने लॉकडॉउन के दौरान मंदिरों के बंद होने पर आस्था से समझौता किया। वैसा भी किया जा सकता है, ताकि संक्रमण से बचा जा सके।- अवनीश राजपाल, व्यवसायी एवं युवा बाइकर हल्द्वानी।
कहीं साल भर की मेहनत बेकार न चली जाए, इसका रखें ध्यान
कुंभ आस्था और परंपरा का प्रतीक है। छह और 12 साल में आयोजन के कारण इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। यही वजह है कि कुंभ में स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर बढ़ रही है। ऐसे में यह ध्यान रखना जरूरी है कि कोरोना को काबू करने में लगी एक साल की मेहनत बेकार न चली जाए। देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की जांच, सैंपलिंग की अनिवार्य व्यवस्था होनी चाहिए। बाहर से जो लोग आएं, उनकी निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य हो और उनका पूरा रिकार्ड (कहां से आए, कितने दिन रहे, कहां ठहरे, आगे कहां जाएंगे) रखा जाए। कैलाश भट्ट, युवा व्यवसायी, हल्द्वानी
श्रद्धालुओं को भी कोरोना से बचाव में निभानी होगी भूमिका
कुंभ का आयोजन हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था और विरासत से जुड़ा हुआ है। मौजूदा हालात में यह दिव्य और विराट तो हो लेकिन कोरोना गाइडलाइंस के पालन के साथ। सरकार के साथ-साथ कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को भी कुंभ के दौरान कोरोना से बचाव में अपनी भूमिका का हर स्तर पर निर्वहन करना होगा। तभी हम इसे दिव्य और विराट बना पाएंगे।
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उपेंद्र अंथवाल, होटल व्यवसायी-देहरादून, लॉकडाउन के दौरान स्वदेशी तत्व नाम से ऑर्गेनिक ब्रांड की शुरुआत की।
कुंभ में इस बार संत समाज को ही हो स्नान का अधिकार
कुंभ में स्नान का पहला अधिकार संत समाज का है। चूंकि इस बार महामारी के बढ़ने का खतरा है तो ऐसे में क्यों न कुंभ में दो गज की दूरी पर संत समाज को ही स्नान करने दिया जाए। कुंभ में भीड़ कम हो इसके लिए उतराखंड और इसके आसपास की राज्य सरकारें अपने अपने यहां लोगों को जागरूक करें कि वह घर में रहकर ही गंगा मैय्या का स्मरण करें। वहां जाने से पहले और लौटने पर श्रद्धालुओं की अनिवार्य रूप से कोरोना जांच हो।-
सचिन नारंग, चिलीज नाम से रेस्त्रां की सीरीज चलाते हैं, देहरादून
कुंभ की अवधि को बढ़ाकर कम की जा सकती है भीड़
कुंभ में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को सावधानी तो बरतनी ही होगी साथ ही कोरोना गाइड लाइंस का भी शत प्रतिशत पालन करना होगा। मौजूदा हालात में मानवता के धर्म को कुंभ से जोड़ना होगा, यानी ऐसा काम जिससे सबका भला हो। यह तब होगा जब हम अपने घर में ही रहकर खुद की शुद्धि करें। ठीक वैसे ही जैसे लॉकडाउन में मंदिरों के बंद होने पर सभी ने अपने अपने घरों में ही पूजापाठ की और इसमें सबका हित हुआ। सरकार को चाहिए कि वह कुंभ की अवधि एक महीने से बढ़ाकर साढ़े तीन महीने कर दे। क्योंकि कुंभ की अवधि कम होने के कारण भीड़ एकाएक बढ़ेगी और यदि समय अधिक होगा तो भीड़ स्वाभाविक तौर पर कम होगी। आने वालों का पंजीकरण अनिवार्य करते हुए यह भी तय किया जाए कि राज्यवार कब कौन स्नान करेगा। इससे व्यवस्थाएं बनी रहेंगी।
-कुबेर भुटियानी, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी हल्द्वानी
कुंभ में जनमानस की आस्था, स्नान का भी अपना महत्व
गंगा से लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था जुड़़ी है। गंगा में स्नान की अपनी महत्ता है। तपश्वियों के कुंभ में आने से इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आस्था और विश्वास से ही जनमानस चलता है। कई सवालों का जवाब विज्ञान नहीं दे सकता है। ऐसे में स्नान की महत्ता को कम नहीं किया जा सकता है। मौजूदा हालात में कुंभ का स्वरूप संतुलित रखना होगा। कुंभ में पहला हक साधुओं का है तत्पश्चात आमजन का। कुंभ में आने से पहले श्रद्धालुओं की अनिवार्य रूप से कोरोना जांच हो। व्यवस्था बनाने में यदि जरूरत पड़े तो सेना की भी मदद ली जाए। क्योंकि सरकार कुंभ में आवागमन पर रोक नहीं लगा सकती लिहाजा हर स्तर पर व्यवस्थाओं को चौकस रखा जाए।
-त्रिभुवन जोशी शिक्षक हल्द्वानी।