उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है अमर उजाला ने उनकी पहचान के लिए अभियान शुरू किया है।
कोरोना ने छीना बेटी के सिर से पिता का साया
हरिद्वार: कोरोना महामारी ने बेटी के सिर से पिता का छाया छीन लिया। जिसके चलते उसे अब आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बेटी को अब वात्सल्य योजना से काफी उम्मीद है। नगर कोतवाली क्षेत्र के खड़खड़ी में रहने वाले पिता की हरिपुर में आई ड्राप्स बनाने की फैक्ट्री थी। पिता 22 अप्रैल को कोरोना पॉजीटिव हुए थे। जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां 28 अप्रैल को उनका निधन हो गया। परिवार में पत्नी व बेटी हैं। बेटी कक्षा 12 की छात्रा है। पिता के निधन के बाद परिवार के कमाने वाला कोई नहीं है। ऐसे में अब बेटी के सामने पढ़ाई को लेकर चिंता होने लगी है। पिता के निधन के बाद फैक्ट्री भी बंद है। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना से मिलने वाली आर्थिक मदद से श्रेया को काफी उम्मीद है।
पहले पिता को खोया अब कोरोना ने मां को भी छीन लिया
नैनीताल: रामनगर निवासी तीन भाई बहनों के पिता की 2009 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। सिर से पिता का साया उठने पर मां ने किसी तरह से तीनों बच्चों की परवरिश की। कोरोना महामारी में मां का भी कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया। अब तीनों भाई बहनों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
खटीमा में दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
रुद्रपुर: खटीमा में रहने वाले एक व्यक्ति की मौत के बाद पत्नी, दो बच्चों और बूढ़े माता, पिता की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। मृतक रुद्रपुर की एक कार एजेंसी में काम करता था और 17 अप्रैल को कोरोना संक्रमित होने पर रुद्रपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन छह मई को उसका देहांत हो गया था। मृतक का परिवार किराए के मकान में रहता है।
पिता की मौत के चार दिन बाद हुआ बेटी का जन्म
देहरादून: अपनों का साथ छोड़ जाने का गम शब्दों में बयां नहीं हो सकता। वैश्विक महामारी ने किसी बच्चे के सिर से पिता का साया छीन लिया तो कोई मां के आंचल से वंचित हो गया। पिता की मौत से बच्चों की जिम्मेदारियों का पहाड़ मां के कंधों पर आ गया है। आय का जरिया न होने से मां के सामने भरण-पोषण व शिक्षा की समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे ही एक अन्य मामले में पति की कोरोना से निधन हुआ तो उनके सामने दो बच्चों की जिम्मेदारी का पहाड़ टूट पड़ा। पति का बीती तीन जून को निधन हो गया। मृत्यु के चार दिन बाद बेटी का जन्म हुआ। इससे पहले आठ साल का बेटा भी है। घर में कमाने वाला कोई नहीं है। आय का कोई दूसरा जरिया न होने से पत्नी के सामने दो बच्चों की परवरिश चुनौती बन गई है।