दिव्यांग (विकलांग) अब किसी के सहारे के मोहताज नहीं रहेंगे। रविवार 10 जनवरी को अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पर लगने वाले शिविर में भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और श्री महंत इंदिरेश अस्पताल की टीम दिव्यांगों की हर संभव सहायता के लिए मौजूद रहेगी।
शिविर में उनकी जरूरत के मुताबिक कृत्रिम अंगों और अन्य उपकरणों की सूची तैयार की जाएगी। श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम दिव्यांगों और अन्य लोगों के स्वास्थ्य की निशुल्क जांच कर उपयोगी परामर्श और औषधियां देगी।
दिव्यांगों की जरूरतों को समझने और सुविधानुसार कृत्रिम अंग और अन्य उपकरण उपलब्ध कराने के लिए अमर उजाला 10 जनवरी को एसजीआरआर पीजी कॉलेज में शिविर लगाएगा। शिविर में दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंगों की नाप-जोख, अन्य जरूरतों का मूल्यांकन और निशुल्क स्वास्थ्य जांच और दवाएं बांटी जाएंगी। एलिम्को की टीम कृत्रिम अंगों के लिए दिव्यांगों के हाथ-पैरों की नाप-जोख करेगी।
इसके अलावा अन्य जरूरतों के मुताबिक रजिस्ट्रेशन कराने वालों को ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, कान की मशीन, ब्लाइंड स्टिक के लिए सूची भी तैयार की जाएगी।
शिविर में भाग लेने के लिए दिव्यांगों को विकलांगता प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से लाना होगा। विकलांगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए प्रत्येक बुधवार को सीएमओ कार्यालय में शिविर आयोजित किया जा रहा है। इसके अलावा शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौजूद रहेगी जो मौके पर दिव्यांगों की जांच कर विकलांगता प्रमाण पत्र देगी।
डॉक्टर करेंगे स्वास्थ्य की जांच
शिविर में दिव्यांगों के साथ आम लोग भी अपने स्वास्थ्य की निशुल्क जांच करवा सकते हैं। श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर निशुल्क स्वास्थ्य जांच कर उपयोगी परामर्श और दवाएं देंगे।
अस्पताल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि आंख, नाक, कान, दांत, हड्डी, मेडिसिन समेत अन्य विभागों के विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद रहकर मरीजों की फ्री जांच करेंगे। उनको सामान्य दवाएं भी अस्पताल से मुफ्त दी जाएगी।
आप भी करें जरूरतमंदों की मदद
अमर उजाला फाउंडेशन के इस अभियान से जुड़कर आप भी किसी असहाय व्यक्ति की मदद कर सकते हैं। अगर आप किसी दिव्यांग व्यक्ति को जानते हैं तो उसे शिविर में पहुंचाकर सहयोग कर सकते हैं।
बुधवार को सीएमओ कार्यालय में जाकर दिव्यांगों का विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाना ना भूले। सभी सामाजिक और राजनीतिक संगठनों-कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से अमर उजाला इस पावन कार्य में सहयोग की अपील करता है। अभियान से जुड़ने के लिए आप 9760757378 पर फोन भी कर सकते हैं।
विकलांगता को मात देकर छुआ शिखर
बचपन में पोलियो की बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद प्रेम कुमार की हिम्मत और हौसले ने देश ही नहीं दुनियाभर में उसे पहचान दी है। दोनों पैरों से लाचार प्रेम पैरालंपिक कॉमनवेल्थ और वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वह राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लगातार तीन बार भाग लेकर छह पदक भी अपने नाम कर चुके हैं। वर्तमान में वह सौ से अधिक दिव्यांग बच्चों को अलग-अलग खेल का प्रशिक्षण देते हैं।
सेवला कलां निवासी प्रेम कुमार जब एक वर्ष के हुए तभी पोलियो से उनके दोनों पैर खराब हो गए। इसके बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। डीएवी से ग्रेजुएशन करने के दौरान भी वह अलग-अलग खेलों में हाथ आजमाते रहते हैं। विशेषकर पैरालंपिक बैडमिंटन (व्हील चेयर) और लांग डिस्टेंस स्वीमिंग में उन्होंने महारत हासिल कर ली।
उनके प्रदर्शन को देखते हुए 2006 में आस्ट्रेलिया में हुए पैरालंपिक कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्हें भारतीय टीम में चुना गया। यहां वह 16वें स्थान पर रहे। 2012 में जर्मनी में खेली गई वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी उन्होंने भारतीय टीम की तरफ से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया।
इसके बाद 2012, 2013 और 2014 में उन्होंने राष्ट्रीय पैरालंपिक बैडमिंटन में सिंगल व डबल्स स्पर्द्धा में तीन रजत और तीन कांस्य पदक जीते। प्रेम उत्तराखंड पैरालंपिक एसोसिएशन के सचिव भी हैं। एसोसिएशन अभी शारीरिक रूप से अक्षम 100 से अधिक बच्चों को रनिंग, शॉटपुट, जेवलिन, हाई जंप, लांग जंप और सिटिंग बॉलीवाल का प्रशिक्षण दे रही है।
प्रेम ने कहा कि अपने कैरियर के शुरूआती दौर में उन्हें कोर्ट की कमी के कारण परेशानी झेलनी पड़ी। वह चाहते हैं कि अन्य लोगों को इस तरह की परेशानी ना झेलनी पडे, इसलिए वह उनकी मदद करने में जुटे हैं।
दिव्यांगो को तबादलों में छूट
उत्तराखंड शिक्षा विभाग में दिव्यांग (विकलांग) शिक्षकों को तबादलों में छूट दी गई है। उन्हें अनिवार्य तबादलों की जद से बाहर रखा गया है। वहीं अनुरोध के आधार पर यथासंभव सुविधाजनक स्थानों पर उन्हें तैनाती दिए जाने का प्रावधान है।
शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नई नियुक्ति और प्रमोशन पर उन्हें दुर्गम और अति दुर्गम विद्यालयों में तैनाती दी जाती है, लेकिन दिव्यांगों के मामलों में ऐसा नहीं है। उन्हें पहली नियुक्ति और प्रमोशन पर सुगम विद्यालय में तैनाती दी जाती है।
वहीं सुगम स्कूलों में अधिक ठहराव के बावजूद उन्हें अनिवार्य तबादलों की जद से बाहर रखा गया है। तबादला नियमावली के अनुसार ऐसे शिक्षक अनुरोध के आधार पर भी तबादला पा सकते हैं। वही विकलांग बच्चों के माता पिता शिक्षक भी अनुरोध के आधार पर तबादला पा सकते हैं।
दिव्यांगों के लिए प्रथम नियुक्ति, पदोन्नति और तबादला नियमावली में छूट के प्रावधान के साथ ही उनकी यथासंभव सुविधाजनक विद्यालय में तैनाती का शासनादेश भी है।