पूरा परिदृश्य बताता है कि शहर से लेकर देहात तक जिले का कोई ऐसा कोना नहीं है, जहां आसानी से शराब या अन्य मादक द्रव्य सहजता से उपलब्ध न होते हों। शुक्रवार को शराब पीने से हुई सामूहिक मौतों ने एक बार फिर जिले की कड़वी हकीकत सामने ला दी है।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि शराब का अनैतिक कारोबार कैसे चल रहा है, इस बारे में आबकारी विभाग और पुलिस के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जा रही है। प्रथम दृष्टया आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आने पर शासन की ओर से 13 कर्मचारी पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं। विस्तृत जांच में जहां भी लापरवाही पाई जाएगी, उस पर भी गंभीर कार्रवाई की जाएगी।
टीबड़ी में वर्ष 2008 में हुई थी चार लोगों की मौत
शहर के बीचोंबीच टीबड़ी में भी वर्ष 2008 में जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो चुकी है। उस समय सामने आया था कि एक मकान में पत्थर और टाइल्स लगाने तथा पुताई करने का काम करने वाले मजदूरों ने शराब में थिनर मिलाकर पिया था। इस कारण दो दिन के अंदर उपचाराधीन रहते हुए चारों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद भी टीबड़ी क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री बंद नहीं हुई। पुलिस को शिकायत करने के बाद भी कई बार यहां छापे मारे गए। महिलाओं ने चुनाव के समय अवैध शराब की बिक्री बंद कराने को लेकर ही मुद्दा बनाया, लेकिन नतीजा सिफर ही निकला।
कहां गए अभियान चलाने का दावा करने वाले
शहर में नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करने वाले पार्षद और अन्य संगठनों से जुड़े युवा आखिर कहां चले गए। जिले में शराब तस्कर और माफिया लोगों को मौत परोस रहे हैं। ऐसे में नशे के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाने का दावा करने वाले युवा नेता फेसबुक पर जनजागरण करने से ज्यादा कहीं आगे नहीं निकल पाए, जबकि तीन दिन पहले बैठक कर उन्होंने पुलिस के साथ ही खुद भी शराब तस्करों के खिलाफ अभियान चलाने का दावा किया था।