बीते छह सौ वर्षों में अलकनंदा कभी इतने खतरनाक तरीके से नहीं उफनाई थी जितना पिछले महीने 16 और 17 जून को। कई जिंदगियों और संपत्ति का भारी नुकसान करने वाली अलकनंदा भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह नतीजा है गढ़वाल विवि के जियोलॉजी विभाग, ऑस्ट्रेलिया की डार्विन यूनिवर्सिटी और अहमदाबाद के फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री के संयुक्त शोध का।
गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर वाईपी सुंद्रियाल, डार्विन यूनिवर्सिटी के प्रो. आरजे वासन और पीआरएल अहमदाबाद के डा. नवीन जुयाल की संयुक्त टीम ने अलकनंदा के जलप्रवाह के बीते 600 वर्षों की स्थिति पर शोध किया है। रिपोर्ट के मुताबिक 600 वर्षों में अलकनंदा में 11 बार भयंकर बाढ़ आई है। 16-17 जून को 12वीं बार आई बाढ़ सबसे खतरनाक रही।
2009 में शुरू हुआ था शोध
बाढ़ को लेकर भैंसवाड़ा में शोध किया गया। प्रो. सुंद्रियाल के मुताबिक यह शोध वर्ष 2009 में शुरू हुआ था जो 2013 में पूरा हुआ है। यह रिसर्च इंटरनेशनल शोध पत्रिका ‘क्वाटरली साइंस रिव्यू’ में प्रकाशन के लिए भी स्वीकृत हो गया है।
1970 की अपेक्षा तीन मीटर ऊपर था जलस्तर
1970 की बाढ़ में अलकनंदा का जलस्तर 538 मीटर था जो कि इस बार 541 मीटर तक पहुंच गया। 1970 में अलकनंदा में आई बाढ़ की वजह से पश्चिमी यूपी तक बुरी तरह प्रभावित हुआ था लेकिन इस बार आई बाढ़ उससे भी ज्यादा खतरनाक थी।
गढ़वाल विवि के रिसर्च स्कालर नरेश राना और सुनील नेगी के सहयोग से हुए शोध में बाढ़ की भयावहता को भी दिखाया गया है। चमोली, टिहरी और पौड़ी से होकर बहने वाली इस नदी की वजह से इन जगहों पर सबसे ज्यादा तबाही सामने आई। अलकनंदा में ज्यादा बाढ़ की वजह से ही गंगा ने जलस्तर के पुराने रिकार्ड दोबारा ध्वस्त किए हैं। श्रीनगर आईटीआई के प्रवेशद्वार तक सिल्ट आ गई है। चमोली, पौड़ी और श्रीनगर के कई और इलाकों में बाढ़ की वजह से पांच हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं।
छह हजार वर्ष पूर्व अलकनंदा के मलबे पर बसा श्रीनगर
शोध में यह बात भी सामने आई है कि जिस टैरेस (नदी द्वारा मलबे से बनाई गई प्लेन जगह) पर श्रीनगर बसा हुआ है, वह छह हजार से 18 हजार साल में अलकनंदा ने ही बनाया है। हालांकि गत 600 वर्षों में नदी ने केवल अपने किनारों पर हमला किया है, बाकी जगह सुरक्षित है। लेकिन माना जा रहा है कि यदि यह रौद्र रूप बरकरार रहता है तो भविष्य में श्रीनगर पर भी खतरा मंडरा सकता है।
कब कब आई अलकनंदा में बाढ़
वर्ष 1413, 1519, 1622, 1725, 1772, 1777, 1784, 1792, 1844, 1894, 1970 और 2013
सतोपंथ से निकलती है अलकनंदा
अलकनंदा का उद्गम स्थल सतोपंथ और भागीरथ खड़क ग्लेशियर से माना जाता है। अलकनंदा घाटी में करीब 190 किलोमीटर बहने के बाद देवप्रयाग में यह नदी भागीरथी में मिल जाती है। यह नदी मुख्यतौर पर चमोली, टिहरी और पौड़ी से होकर बहती है। भागीरथी से मिलने के बाद गंगा बनती है जो कि देशभर में धार्मिक आस्था का प्रतीक है।
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