सीमा पार शत्रु से भिड़ने और आत्मघाती दस्ते बनाने का प्रस्ताव कर चुकी अखाड़ा परिषद सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए बॉर्डर पर जा सकती है। इस संबंध में अंतिम निर्णय 28 नवंबर को प्रयाग में हो रही परिषद की बैठक में लिया जाएगा। अखाड़ा परिषद ने कालेधन के खिलाफ शुरू किए गए अभियान का भी समर्थन किया है।
सात नवंबर को हरिद्वार में हुई बैठक में परिषद यह कह चुकी है कि केंद्र सरकार यदि चाहे तो नागा संन्यासी सीमा पर जाकर लड़ने को तैयार हैं। पाकिस्तानी आतंकवादियों की तरह खुद आत्मघाती दस्ते बनाने का निर्णय परिषद भी ले चुकी है।
मंगलवार को अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए संत समाज सीमा पर लड़ रहे जवानों के बीच जाने को तैयार है।
सैनिकों के बीच जाने के लिए पीएम से मिलेंगे संत
अखाड़ा परिषद पहले आत्मघाती दस्ते बनाने का प्रस्ताव पास कर चुकी है।
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प्रयाग बैठक के बाद संतों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली जाएगा। उनसे आग्रह किया जाएगा कि संतों के प्रतिनिधियों को सैनिकों के बीच जाने की अनुमति प्रदान की जाए।
हरि गिरि ने बताया कि प्रयाग बैठक में इस आशय का प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा। कालेधन के खिलाफ अभियान को जोरदार ढंग से चलाया जाना चाहिए। बड़े नोट बंद करने के निर्णय का उन्होंने स्वागत किया।
हरि गिरि ने कहा कि आतंकवादियों से कालेधन के बल पर कश्मीर में युवाओं को खरीदा गया है। यह धन नहीं रहेगा तो पाकिस्तान की कमर टूट जाएगी।
कश्मीर के हालात पर चिंतित संत समाज
अखाड़ा परिषद
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अखाड़ा परिषद के महामंत्री कई बिंदुओं पर इन दिनों 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों से वार्ता कर रहे हैं। हरिद्वार बैठक में छह प्रस्ताव पारित किए गए थे। इन प्रस्तावों के आधार पर संतों को नए संदर्भों में गोलबंद किया जाएगा।
सभी अखाड़े विशेष रूप से कश्मीर के हालात पर चिंता ग्रस्त है। हरि गिरि ने बताया कि हिंदू धर्मस्थलों का समय-समय पर राज्य सरकारों द्वारा अधिग्रहण कर लिया जाता है। यह संविधान की मूल भावनाओं के खिलाफ है। हिंदू-मठ-मंदिरों पर कई कर भी थोपे जाते हैं। इस बात को भी संत प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे।