सीसीयू प्रोजेक्ट निर्माणाधीन
सीबीआई ने पाया कि ये वस्तुएं और उपकरण रजिस्टर में तो दर्ज थीं मगर स्टोर में सामान नहीं था। लिहाजा यह प्रमाणपत्र भी झूठा पाया गया। असल कहानी तब शुरू होती है जब सीबीआई ने सीसीयू का निरीक्षण किया। वहां देखा तो दरवाजा बंद था और लिखा था सीसीयू प्रोजेक्ट निर्माणाधीन है। जब दरवाजा खोला गया तो देखा कि उपकरण बेतरतीब पड़े हुए थे। फर्श टूटा हुआ था। वहां पर किसी उपकरण का इंस्टालेशन हुआ था तो कुछ को यूं ही छोड़ दिया गया था। वहां पर पर्दे नहीं थे। ऑटोमेटिक स्लाइडिंग डोर नहीं था। सीलिंग का काम पूरा था न ही दीवारों का। इसी तरह वहां पर सबसे महंगा उपकरण डिफिब्रिलेटर भी नहीं था। यही दिल के मरीजों के लिए जीवनरक्षक उपकरण माना जाता है। इन सब अनियमितताओं में सीबीआई ने डायरेक्टर समेत तीन के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है।
ये सामान नहीं थे
-ऑटोमैटिक स्लाइडिंग डोर (2,79,500 रुपये)
-सर्जन कंट्रोल पैनल (5,85,000 रुपये)
-मोटराइज्ड ब्लेंड विंडो (5,20,000 रुपये)
-इलेक्ट्रिकल वर्क (5,20,000 रुपये)
-16 बेड के लिए पार्टिशन व पर्दे (11,440 रुपये)
-मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम (98,00,000 रुपये)
-डिफिब्रिलेटर (13,30,641 रुपये)
-सक्शन मशीन (1,21,781 रुपये)
-16 एयर प्यूरीफायर (44,57,143 रुपये)
कुल-1,76,25,505 रुपये का सामान गायब पाया गया।
ये भी पढे़ं...UKSSSC Paper Leak Case: सीएम धामी ने दिल जीता तो युवाओं ने जंग...आश्वासन पर बेरोजगारों ने स्थगित किया धरना
निर्माण
-दीवार पैनलिंग: बिल में 362 वर्गमीटर दिखाए, मौके पर सिर्फ 224.71 वर्गमीटर पाए गए घोटाला हुआ 89,23,850 रुपये का।
-सीलिंग-बिल में 271 वर्गमीटर, मौके पर 259 वर्गमीटर घोटाला हुआ 7,80,000 रुपये।
कुल-घोटाला 97,03,850 रुपये।