केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में एम्स की स्थापना हुई। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज ने इस काम को आगे बढ़ाया। ऋषिकेश में एम्स की स्थापना उन्हीं के कार्यकाल में हुई थी, मुझे खुशी है इस बात की कि तेजी के साथ विकास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यहां से उपाधि लेने वालों सम्मानित करने का मौका मिल रहा है यह भी हमारे लिए गौरव की बात है।
कहा कि यहां स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसका लाभ सिर्फ उत्तराखंड कोई नहीं मिल रहा है, बल्कि देश के पश्चिम क्षेत्र को भी इसका लाभ मिल रहा है। आने वाले समय में देश को 22 और एम्स मिलने वाले हैं। अटल बिहारी वाजपेई ने छह एम्स से शुरुआत की थी। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस काम को तेजी के साथ आगे बढ़ाया है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि ऋषिकेश पूरे विश्व में योग की राजधानी है। अध्यात्म के शिखर का यह स्थान है। यहां दीक्षा समारोह का होना गौरव की बात है। उपाधि ग्रहण करने वालों को समाज में जाकर लोगों के जीवन की रक्षा करनी है। देश के विराट व्यक्तित्व गृह मंत्री अमित शाह के हाथों आप सभी को उपाधि मिल रही है, यह बड़े गौरव की बात है।
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सुबह बह 11 बजे बीएसएफ के चार्टर विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। यहां उनकी अगवानी के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा बंशीधर भगत समेत कई विधायक और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे।
एयरपोर्ट से वह सड़क मार्ग से ऋषिकेश एम्स पहुंचे। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन भी कार्यक्रम में मौजूद हैं। यहां दीप प्रज्जवलन के बाद कार्यक्रम शुरू किया गया।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 13 पीएचडी, पीजी, एमबीबीएस 2013, 2014, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल देकर सम्मानित करेंगे। उन्होंने बताया कि कुल 252 विद्यार्थियों को डिग्री दी जानी है। साथ ही 132 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र भी दिए जाने हैं। एम्स के प्रथम दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिरकत की थी। गृहमंत्री अमित शाह का दोपहर तीन बजे वापसी का कार्यक्रम है।
दीक्षांत समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ही नहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन भी मौजूद थे। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि वे दुनिया में फैले कोरोना वायरस पर कुछ बोलेंगे। लेकिन पूरे कार्यक्रम के दौरान किसी ने कोरोना शब्द तक नहीं बोला। हालांकि कार्यक्रम स्थल पर प्रत्येक व्यक्ति को थर्मल स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद ही भीतर जाने की अनुमति दी गई।
इस टेस्ट को पास नहीं करने वाले व्यक्ति को समारोह में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। कार्यक्रम की समाप्ति पर पत्रकारों ने इस विषय में डॉ. हर्षवर्द्धन से बात करनी चाही, लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। हां, चलते-चलते इतना जरूर कहा, घबराने की जरूरत नहीं है, स्थितियां नियंत्रण में हैं।
डॉक्टरी तभी सभी सफल, जब निचले तबके तक पहुंचे लाभ
एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रविकांत युवा चिकित्सकों को दुनिया से सीखो और दुनिया को भी सिखाओ की सीख दी। उन्होंने कहा कि युवा चिकित्सकों को सदा स्मरण रखना चाहिए कि चिकित्सा व्यवसाय में रोगियों के लिए हर समय उपलब्ध होना, अपने कार्य में दक्ष होना और मिलनसार होना अनिवार्य है। एक डॉक्टर के कार्य की कुशलता इतनी ही नहीं है कि वह मरीज को कितनी जल्दी ठीक करता है, बल्कि मरीज का ठीक होना बहुत हद तक इस बात पर भी निर्भर करता है कि डॉक्टर का मरीज के साथ कैसा व्यवहार है।
उन्होंने युवा चिकित्सकों से कहा कि प्रारंभिक वर्षों में आपका व्यवहार ही आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक रोगी से बातचीत आपकी क्षमताओं का परीक्षण और सीखने का अनुभव प्रदान करेगी। उन्होंने युवा चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे वंचित तबके के लोगों पर विशेष ध्यान दें। अपकी डॉक्टरी तभी सभी सफल होगी, जब आपकी उत्कृष्टता का लाभ समाज के निचले तबके तक पहुंचेगा।
मंच पर दिखी उत्तराखंड संस्कृति की झलक
दीक्षांत समारोह के मंच को बेहद सादगी पूर्वक ढंग से सजाया गया था। खास बात यह रही कि समारोह में मौजूद देशभर के कोने-कोने से यहां पढ़ने आए छात्रों और उनके परिजनों को मंच के दायीं और बायीं ओर सुंदर चित्रों के माध्यम से उत्तराखंड संस्कृति की झलक दिखाई दी। जिसमें ढोल-दमाऊ, मशकबीन बजाते लोग, भुल्ली की सुंदर छवी प्रस्तुत करती आकृति, लोकनृत्य करते लोग इत्यादि हॉल में बैठे लोगों को आकर्षित कर रहे थे।